चीताखेड़ा। समीपस्थ ग्राम चैनपुरा डेम के विगत 10 सालों से मौत और जिन्दगी के बीच संघर्ष करते- करते 50 वर्षीय सुरेश रावत आखिर 10 वर्षों बाद 16-17 फरवरी की मध्य रात्रि को मौत के सामने हार गया। अंतिम शवयात्रा उनके निवास स्थान से निकल गई। जिसमें रावत समाज के अलावा अन्य समाजजन बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए।
50 वर्षीय सुरेश रावत विगत 10 वर्षों पूर्व एक सड़क वाहन दुर्घटना में बुरी तरह से रीड की हड्डी में गंभीर चोट लगने के कारण विकलांग के रूप में अपने ही घर में एक ही जगह मौत और जीवन के बीच संघर्ष कर रहा था। कुछ दिन पूर्व उनके स्वास्थ्य में तकलीफ अधिक होने पर ईलाज हेतु नीमच चिकित्सालय भर्ती कराया गया जहां कुछ दिनों तक उपचार चला लेकिन उनके स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं हुआ और अचानक तबियत बिगड़ी बाद उन्होंने आखिर मौत के सामने हार मान ली और 16 व 17 फरवरी की मध्य रात्रि को अचानक उनका दु:खद निधन हो गया। सुरेश रावत वैसे राजनीतिक विचारधारा से कांग्रेस पार्टी में निःस्वार्थ भाव से सक्रिय रहे हैं। सुरेश रावत हंसमुख मिलनसार मृदुभाषी सरल स्वभाव से सामाजिक कार्यकर्ता था। सोमवार को उनके निधन होने की सुचना जैसे ही दक्षिण मंडल के गांव गांव में ग्रामीण जनों को मिली शौक की लहर दौड़ गई। इनकी अंतिम शवयात्रा में सैकड़ों ग्रामीण जन मौजूद थे। सभी ने मुक्तिधाम पर मुखाग्नि के पश्चात् शौक संवेदना व्यक्त कर दिवंगत आत्मा को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित की।