कुकड़ेश्वर। प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी कुकड़ेश्वर नगर में भगवान सहस्त्रमुकेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण में महाशिवरात्रि मेला आयोजित किया जा रहा है। नगर परिषद कुकड़ेश्वर द्वारा आयोजित यह मेला 26 फरवरी से प्रारंभ होकर आठ दिवसीय रहेगा। मेले में व्यापारिक, धार्मिक और मनोरंजन से जुड़ी विभिन्न गतिविधियां होंगी, जिससे नगरवासियों और श्रद्धालुओं को आनंद की अनुभूति होगी।
बच्चों के मनोरंजन के लिए विशेष आकर्षण
बच्चों और युवाओं के मनोरंजन के लिए मेले में झूले, चकरी, नाव, टोरो-टोरो, ब्रेकडांस और ड्रैगन रेल जैसे रोमांचक खेल उपलब्ध होंगे। स्वर्गीय बहादुर भैया का नाम आज भी इस मेले में बड़े सम्मान से लिया जाता है, जो वर्षों तक बच्चों के मनोरंजन का हिस्सा रहे।
झूले और मनोरंजन स्टॉल लगाने वाले चुम्मा भाई, बिल्ला भाई और जब्बार भाई का कहना है कि वे पिछले 60 वर्षों से इस मेले में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इस बार उन्होंने तीन बड़ी नाव, एक ब्रेकडांस, एक टोरो-टोरो और एक ड्रैगन रेल लेकर आए हैं, जिससे बच्चों और युवाओं को खासा आनंद मिलेगा।
भोलेनाथ की कृपा- मंदिर परिसर में होते हैं चमत्कार
मंदिर पुजारी कैलाश गोस्वामी ने बताया कि हर वर्ष महाशिवरात्रि से पहले मंदिर परिसर में चमत्कार देखने को मिलते हैं। विशेष रूप से मधुमक्खी भंवर माता का आवागमन होता है, जिसे श्रद्धालु भोलेनाथ की कृपा मानते हैं। इस वर्ष भी बुधवार को शुभ मुहूर्त में मधुमक्खी भंवर माता पीपल के पेड़ पर विराजित हो गई हैं।
भक्त काजल पेंटर ने बताया कि उन्होंने खुद भी कई चमत्कार देखे हैं। उनका कहना है कि ष्मैं उदा खेड़ा बालाजी के पास पेंटिंग का काम करने गया था, वहां भी मधुमक्खी मातेश्वरी उड़ी हुई थीं, लेकिन उन्होंने किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया। जो गलत करता है, उसे ही नुकसान उठाना पड़ता है।
मेले की तैयारियां जोरों पर-
मेले की तैयारियों को देखते हुए झूले-चकरी, नाव और ड्रैगन रेल लगाने वालों ने मेला प्रांगण में डेरा जमा लिया है। मेले की शोभा बढ़ाने के लिए होशंगाबाद से भी झूले-चकरी वाले पहुंचे हैं। महाशिवरात्रि से पहले भोलेनाथ की कृपा से मंदिर और मेले में कई अद्भुत घटनाएं होती हैं। भक्तगण इन पवित्र क्षणों का अनुभव लेने दूर-दूर से आते हैं।
नगर परिषद, पुलिस प्रशासन और स्थानीय व्यापारियों का मेले को सफल बनाने में विशेष सहयोग रहता है, जिससे यह आयोजन हर साल और भी भव्य और आकर्षक बनता जा रहा है। कुकड़ेश्वर नगरवासियों के लिए यह मेला आस्था, भक्ति और आनंद का संगम साबित हो रहा है।