उज्जैन। प्रयागराज कुंभ अपने अंतिम दौर में है। वहां गए साधु-संत, महंत और महामंडलेश्वर अपने-अपने अखाड़ों में लौटने लगे हैं। उज्जैन में भी साधु-संत वापस आ चुके हैं और अब वे आने वाले 2028 सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों में जुट गए हैं।
उज्जैन के संतों की सबसे बड़ी चिंता शिप्रा नदी में मिलने वाले नाले हैं। इसे देखने के लिए तेरह अखाड़ों के साधु-संत एक साथ शुक्रवार सुबह शहर के उन इलाकों में भ्रमण करेंगे जहां शिप्रा नदी नालों के कारण दूषित हो रही है।
स्थानीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत डॉ. रामेश्वर दास महाराज ने बताया कि शहर के नालों को बंद करने और उन्हें टाटा सीवरेज से जोड़ने की योजना के बाद वर्तमान स्थिति का जायजा लेने के लिए साधु-संतों का एक दल शुक्रवार सुबह निकलेगा।
इसका प्रारंभ कवेलू कारखाने इलाके से होगा, जिसके बाद शहर के अन्य स्थानों पर टाटा कंपनी द्वारा किए गए नालों के बंद होने की स्थिति का निरीक्षण किया जाएगा। इस दौरान तेरह अखाड़ों के संत-महंतों के साथ महंत भगवान दास, महंत रामेश्वर गिरी, महंत विशाल दास, महंत राघवेंद्र दास, महंत दिग्विजय दास, महंत विद्या भारती सहित महामंडलेश्वर भी उपस्थित रहेंगे।