नीमच। जिले में हाल ही में हुई अत्यधिक बारिश और जलभराव से किसानों की फसलें बर्बाद हो गई हैं। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि खेतों में खड़ी फसलें सड़ने लगी हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। इस विकट परिस्थिति को देखते हुए भारतीय किसान संघ, जिला नीमच ने आज कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें प्राकृतिक आपदा से हुई फसल क्षति का त्वरित सर्वे कराने और प्रभावित किसानों को शीघ्र मुआवजा दिलवाने की मांग की गई है।
ज्ञापन में बताया गया है कि नीमच जिले के कई गांवों और तहसीलों में बीते दिनों हुई अत्यधिक वर्षा के कारण खेतों में पानी भर गया है। सोयाबीन, जो इस क्षेत्र की मुख्य फसल है, वह सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। किसानों ने बताया कि फसल में अफलन की स्थिति बन गई है, यानी पौधे में फूल तो आए लेकिन फलियां नहीं बनीं। वहीं कई खेतों में पीला मोजक ने फसल को जड़ से खत्म कर दिया है।
भारतीय किसान संघ ने स्पष्ट किया कि यदि तत्काल सर्वे नहीं हुआ और मुआवजे की कार्रवाई आरंभ नहीं हुई, तो किसानों की स्थिति और भी दयनीय हो जाएगी। उनकी आर्थिक हालत पहले से ही डांवाडोल है और अब यह आपदा उनकी आर्थिक रीढ़ तोड़ने वाली साबित हो रही है।संघ ने अपने ज्ञापन में यह भी जोर दिया कि जिन किसानों ने फसल बीमा कराया है, उन्हें बीमा की राशि अधिकतम 72 घंटे के भीतर दी जाए।
संघ का कहना है कि यह किसानों का वैधानिक और नैतिक अधिकार है। किसानों को राहत देने की बजाय अगर बीमा कंपनियां और प्रशासन देरी करते हैं, तो यह अन्याय होगा।संघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि वे शांतिपूर्वक समाधान चाहते हैं, लेकिन किसानों की उपेक्षा अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ज्ञापन सौंपने के दौरान संघ के पदाधिकारी और किसान मौजूद रहे।
उन्होंने प्रशासन से अपील की कि किसान इस समय अत्यंत संकट के दौर से गुजर रहे हैं, इसलिए प्रशासन को चाहिए कि वह संवेदनशीलता और तत्परता दिखाते हुए किसानों की समस्या का शीघ्र निराकरण करे।