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August 26, 2025, 5:13 pm
NEWS : चित्तौड़गढ़ के सेती स्थित अरिहंत भवन में धर्मसभा का आयोजन, महासती विद्यावती ने कहा- संत भक्ति का अर्थ ही प्रभु भक्ति है, पढ़े रेखा खाबिया की खबर 

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चित्तौड़गढ़। सेती स्थित अरिहंत भवन में धर्म सभा को संबोधित करते हुए महासती विद्यावती ने कहा कि भक्ति श्रध्दा के साथ हो तो कठिनाइयां बीच में नहीं आती है । संसार रूपी भवसागर पार हो जाता है । श्रद्धा के साथ समर्पण के साथ भक्ति के अनेक उदाहरण है। भोगों के कारण भव बिगड़ते हैं । प्रभु का अवलंबन लेकर श्रद्धा भक्ति से जो ध्यान लगाते हैं बेड़ा पार हो जाया करता है।
उन्होंने कहा ज्ञान का सहारा लेकर लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं। लक्ष्य तय होना चाहिए। सर्व समर्पण ऊंचाइयां दिलाता है । ज्ञान और क्रिया का संगम सम्यक होना चाहिए। सरलता , सहजता, निष्कपटता, नैतिकता, ईमानदारी जैसे गुण धर्म कार्य में प्रवेश से पूर्व प्राथमिकता है । यह गुण होना ही चाहिए। फिर श्रद्धा भक्ति से की गई आराधना लक्ष्य तक पहुंचती ही है । भक्ति में हनुमान के जीवन का मार्मिक उदाहरण दिया। राम के प्रति उनकी भक्ति का उदाहरण आज भी पढ़ा सुना समझा जाता है। गौतम स्वामी की भक्ति प्रभु महावीर से हुई और उनका भी उदाहरण बड़ी श्रद्धा के साथ आज भी पढ़ा सुना समझा जाता है । पर्युषण पर्व के दौरान भक्ति श्रद्धा का सैलाब है। ऐसा सदेव जीवन में रहना चाहिए। प्रत्येक आत्मा सम्यक ज्ञान सम्यक क्रिया सम्यक चारित्र की आराधना करें । समय मात्र का प्रमाण न हो। क्षमावन जीवन जीए। जियो और जीने दो , प्रत्येक जीव के प्रति दया के भाव रहे करुणा के भाव रहे और धर्म ध्यान त्याग तपस्या से जीवन सरोबार हो । अनेक भाई-बहन तपस्या कर रहे हैं । बहुत ही अच्छा तप का माहौल है। संतभक्ति का अर्थ ही प्रभु भक्ति है । भव्य आत्माएं पर्युषण के दौरान मोक्ष पधारी हैं।  पर्युषण के 8 दिन साधना हेतु बहुत ही महत्वपूर्ण है।  तुलसीदास जी की भक्ति का उदाहरण मार्मिक तरीके से बताया। महासती नमन श्री जी  ने अंतगढ़ सूत्र के माध्यम से एवंत मुनि का वर्णन सुनाया एवं धर्म ध्यान हेतु प्रेरित किया । महासती मर्यादा श्रीजी ने आचार्य श्री नानालाल जी महाराज के जीवन का वर्णन सुनाया एवं प्रेरक घटनाओं से मार्मिक विवेचन किया एवं उनके जीवन के अनुशासन सेवा समर्पण अध्ययनशीलता नेतृत्व गुणों आदि को विस्तार से बताया।अनेक श्रावक श्राविकाओं के तपस्याओं के क्रम में उपवास एकासन बेला तेला एवं सात आठ की तपस्याओं के प्रत्याख्यान करते हुए महासती विद्यावती ने मंगल पाठ सुनाया। धर्मसभा का संचालन विमल कोठारी ने किया। गुरुवार को सामूहिक पारणा अरिहंत भवन में लाभार्थी बोरदिया परिवार चित्तौड़गढ़ की ओर से होंगे।

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