कंजार्डा। जैन समाज द्वारा संवत्सरी पर्व बड़े हर्षाेल्लास और श्रद्धा भाव के साथ मनाया गया। सकल जैन संघ साधुमार्गी संघ अध्यक्ष दिलीप भंडारी ने बताया कि प्रति वर्षानुसार इस वर्ष भी पर्यूषण पर्व के पावन अवसर पर समता प्रचार संघ के साधु-संतों द्वारा 8 दिन तक स्थानक में प्रवचन आयोजित किए गए।
इस अवसर पर पू. पूरण प्रकाश गांधी सिंगोली, निर्मल कुमार कोचर और निलेश कुमार सेठिया ने प्रवचन देकर समाजजनों को सम्यक ज्ञान प्रदान किया।
प्रवचन में गांधीजी ने कहा कि हम 84 लाख जीवों से याचना तो करते हैं, लेकिन अपने घर-परिवार और समाज में योग्य व्यक्ति से क्षमा नहीं मांगते। बीते वर्ष में अनजाने में हुई गलतियों के लिए हमें क्षमा मांगनी चाहिए। क्षमा करने और क्षमा मांगने से शत्रु भी मित्र बन जाते हैं। क्षमा वीरों का आभूषण है। जैसे नीम की निंबोली समय आने पर अपना कड़वापन छोड़कर मीठी हो जाती है, वैसे ही मनुष्य को भी कटुता छोड़कर मधुरता अपनानी चाहिए। फटे हुए कपड़ों को सील दिया जाता है तो टूटे हुए दिलों को क्यों नहीं जोड़ा जा सकता? संवत्सरी पर्व पर बड़ी संख्या में समाजजनों ने उपस्थित होकर धर्मलाभ लिया।