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August 30, 2025, 7:39 pm
BIG REPORT : खरीफ सीजन की फसलों में इल्लियों के प्रकोप और पीला मौजेक वायरस ने तोड़े किसानों के सपने, बड़ रहा कर्ज का बोझ, अन्नदात हो रहा हैरान और परेशान, पढ़े भगत मांगरिया की खबर 

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चीताखेड़ा। पिछले 5 सालों से कभी अतिवृष्टि तो कभी अल्प वर्षा  से फसले चौपट हो रही है,फसले किसानों के घरों में कभी सुरक्षित नहीं गई। प्रकृति के प्रकोप ने किसानों के सपने चकनाचूर कर दिए। प्रकृति का मारा किसान कर्ज के बोझ तले दबा जा रहा है, लेकिन किसानों को ना सरकार और ना ही बीमा कंपनी राहत दे पा रही है। जिसको दिया मासूम बच्चों को गोली बिस्किट के पैसे के समान दिया, यानी कि ऊंट के मुंह में जीरा के समान, तो कई किसानों को दिया ही नहीं। इस बार पैदावार अच्छी होने की उम्मीद थी पर खरीफ की प्रमुख फसल सोयाबीन की फसलों में पीला म्यूजिक रोग का जबरदस्त आक्रमण एवं इल्ली के प्रकोप तथा वायरस से फसलों को पकाने से पूर्व ही सूखने लगी फैसले तथा गत वर्ष की राहत राशि एवं फसल बीमा और ना ही मुआवजा मिला। प्रकृति और सरकार का मारा किसान बर्बादी के चौराहे पर आ गया है, लेकिन सरकार और प्रकृति के आगे मजबूर किसान ठगा गया।
खरीफ सीजन की फसल सोयाबीन, उड़द, मूंगफली, मक्का आदि फसलों में जबरदस्त पीला मौजेक वायरस व अन्य रोगों के कारण किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है। प्रारंभ में बरसात की लंबी खेंच और पीला मोजेक वायरस के चलते समय से पूर्व ही सूख चुकी फसलों में सोयाबीन का दाना भी नहीं पक पा रहा है, अफलन हो जाने से किसान दुःखी हो गया है। पहले ही किसानों ने कर्जा लेकर महंगे दाम का बीज बोया था और अब लागत मूल्य तो ठीक उसे पर आज स्थिति ऐसी है कि निंदाई- गुड़ाई एवं खाद के रुपए भी नहीं निकल रहे हैं। पहले से ही आर्थिक मंदी की मार झेल रहे किसानों को राहत राशि की जरूरत है,सभी क्षेत्रों से अब फसलों के सर्वे एवं मुआवजा की मांग उठने लगी है। किसानों का कहना है कि इस वर्ष उन्होंने महंगा बीज लाकर बोवनी की थी सीजन में प्रारंभ से ही प्रकृति की मार के सामने बरसात की लंबी खेंच के कारण फसले प्रभावित रही अब सभी क्षेत्रों में कुछ बारिश हुई तो काफी कम बरसात के कारण बीमारियों ने फसलों को दबोच लिया।  बरसात की लंबी खेंच और बीमारी के कारण फसले पीली पड़कर पकाने से पूर्व ही सुखने गई है।
किसानों की माने तो रबी की फसल के आंसू अभी सुखे भी नहीं है कि खरीफ से भी राहत की उम्मीद कुछ नहीं  दिख रही है। चीताखेड़ा के कृषक दिलीप टेलर का कहना है कि 2 बीघा खेत में सोयाबीन फसल बोई थी बुआई करने के बाद बारिश नहीं हुई,जब जरुरत थी तब नहीं आई फ़सल का ग्रोथ नहीं हुआ इल्लियों ने आक्रमण किया दवा का छिड़काव किया इतने में पीला मोजेक वायरस हावी हो गया पौधों पर फलियां भी नहीं आई। शासन प्रशासन को चाहिए कि बीना सर्वे के मुआवजा और फसल बीमा सभी किसानों को दिया जाए।

इनका कहना -
रबी की फसल भी कर्ज लेकर बाई थी उसका कर्ज उतरा ही नहीं की दूसरा कर्ज और हो गया। इस बार मानसून और पीला मोजेक वायरस एवं इल्लियों के कारण फैसले बर्बाद हो गई। 5 बीघा खेत में महंगे भाव की सोयाबीन की फसल बोई थी बरसात की लंबी खेंच और पीला मौजेक वायरस के कारण अफलन होकर पूरी फसल नष्ट हो गई।-  कृषक अशोक सोलंकी चीताखेड़ा ।

पिछले वर्ष अतिवृष्टि से पूरी तरह फैसले बर्बाद हो गई थी, इस वर्ष सोयाबीन में बरसात की कमी के कारण और पिला मौजेक लग गया जिससे उत्पादन में 70ः से भी अधिक नुकसान हुआ है।-  कृषक रामेश्वर गुर्जर देवियां ग्वाल।

20 बीघा खेत में सोयाबीन की फसल बोई शुरू से ही बरसात की लंबी खेंच और कम मात्रा में बरसात से फसलों में ग्रोथ नहीं बन पाया। अब लगातार रुक-रुककर बारिश से फसलों में 65 से 70ः नुकसान हो चुका है। शासन प्रशासन को चाहिए कि जल्द क्षेत्र में सर्वे कर किसानों को मुआवजा और फसल बीमा देना चाहिए।-  कृषक जगदीश चंद पाटीदार नायनखेडी।

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