शाजापुर। सार्वजनिक गणेश उत्सव समिति एवं मां विजयासन भक्त मंडल, शाजापुर के संयुक्त तत्वावधान में आदर्श नवीन नगर में बुधवार रात विराट हास्य कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन हुआ। हास्य, व्यंग्य, ओज और मालवी गीतों से सजे इस साहित्यिक महोत्सव ने नगरवासियों को देर रात तक बांधे रखा। भारी बारिश के बावजूद श्रोता अंत तक डटे रहे और कवियों की हर प्रस्तुति का तालियों की गड़गड़ाहट से स्वागत किया।
संध्या 8 बजे कार्यक्रम की शुरुआत वरिष्ठ कवि बालचंद सूर्यवंशी द्वारा माँ सरस्वती वंदना से हुई। प्रारंभ में सभी आमंत्रित कवियों का अंगवस्त्र ओढ़ाकर सम्मान किया गया। इसके बाद एक के बाद एक प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को ठहाकों और ओजपूर्ण भावनाओं से सराबोर कर दिया।
कवियों की प्रमुख प्रस्तुतियाँ-
हरिओम पाटीदार ‘लाहौरी’ ने रचना “दुनिया का इतिहास कहां लिखा है बिना युद्धों के” सुनाकर श्रोताओं को सोचने पर विवश किया।
राजकुमार अकेला (जावर-आष्टा) ने “ये चीज बड़ी है डस्ट डस्ट” सुनाकर श्रोताओं को ठहाकों से लोटपोट कर दिया।
जितेंद्र देवतवाल ‘ज्वलंत’ (राष्ट्रीय कवि) ने ओजपूर्ण पंक्तियाँ “गगन गूँजे पुकारों से, तू हर्ता विघ्न को हर ले…” प्रस्तुत कर माहौल को भक्तिभाव से भर दिया।
संतोष मतवाला (शाजापुर) ने “हिन्दी, हिन्दू और हिन्दुस्तान को नमन” सुनाकर जोश जगाया और साथ ही सम्मेलन का सफल संचालन किया।
बालचंद सूर्यवंशी (मालवी कवि) ने अपनी सहज रचना “म्हारे अंग्रेजी कम आय है” से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया।
सज्जाद अहमद कुरैशी (शाजापुरी कवि) ने भावपूर्ण कविता “तुझे क्या चढ़ाऊँ मैं” से सराहना बटोरी।
संजय बोराडे ने “क्यों रे गधे” जैसी हास्यपूर्ण रचना से खूब हंसी बटोरी।
मशहूर शाजापुरी हास्य-व्यंग्यकार ने धारदार प्रस्तुतियों से व्यंग्य और हास्य का अद्भुत संगम पेश किया।
सम्मेलन के सूत्रधार अखिल भारतीय साहित्य परिषद के अध्यक्ष जितेंद्र देवतवाल ‘ज्वलंत’ रहे। देर रात तक शाजापुर काव्य और ठहाकों की गूंज से सराबोर रहा।