रतलाम। प्रदेशभर में इन दिनों किसानों से जुड़े मुद्दे एक बार फिर चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। पराली जलाने पर सख्त कार्रवाई और किसानों पर केस दर्ज किए जाने की घटनाओं के बीच अब गेहूं पंजीयन जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में आ रही समस्याओं ने किसानों की नाराजगी को और बढ़ा दिया है।
पराली पर सख्ती, किसानों में नाराजगी-
किसानों का कहना है कि जब पराली जलाने का मामला सामने आता है, तो प्रशासन तुरंत सक्रिय होकर कार्रवाई करता है और कई बार किसानों पर केस भी दर्ज कर दिए जाते हैं। लेकिन जब बात गेहूं पंजीयन या अन्य कृषि संबंधी समस्याओं की आती है, तो संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली धीमी नजर आती है।
किसानों की दोहरी मार का आरोप-
ग्रामीणों और किसान संगठनों का आरोप है कि किसान दिन-रात मेहनत कर देश का पेट भरता है, लेकिन खुद आर्थिक तंगी और परेशानियों से जूझता रहता है। ऐसे में केवल किसानों पर ही सख्ती होना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
औद्योगिक प्रदूषण पर उठे सवाल-
किसानों ने यह भी मुद्दा उठाया कि जिले में कई औद्योगिक इकाइयां लगातार प्रदूषण फैला रही हैं, लेकिन उन पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती। उनका कहना है कि फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं भी पर्यावरण के लिए उतना ही हानिकारक है, जितना पराली जलाना, फिर भी कार्रवाई का दायरा सीमित क्यों है।
प्रशासन से निष्पक्षता की मांग-
इस पूरे मामले में किसानों ने प्रशासन से निष्पक्षता की मांग की है। उनका कहना है कि यदि पर्यावरण संरक्षण के लिए नियम बनाए गए हैं, तो उनका पालन सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए। साथ ही गेहूं पंजीयन जैसी प्रक्रियाओं को सरल और समयबद्ध बनाया जाए, ताकि किसानों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।