चित्तौड़गढ़। सामाजिक परंपराओं में सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक प्रेरणादायी पहल सामने आई है। भीलवाड़ा शहर के समीप स्थित जितिया खेड़ी निवासी सुखदेव जी बैरवा के सुपुत्र एवं राजस्थान पुलिस में कार्यरत कालू लाल बैरवा तथा इंडियन आर्मी में कार्यरत गोपाल बैरवा ने अपनी बड़ी बहन स्वर्गीय नंदू देवी बैरवा की पुण्य स्मृति में मृत्यु भोज का आयोजन नहीं करने का निर्णय लिया। इसके बजाय उन्होंने मृत्यु भोज में होने वाले खर्च की राशि शिक्षा के क्षेत्र में लगाने का संकल्प लेते हुए विद्यालय परिवार को 1,11,111 रुपए की राशि भेंट की।
परिजनों ने बताया कि मृत्यु भोज में खर्च होने वाली राशि यदि विद्यार्थियों की शिक्षा और विद्यालय के विकास में उपयोग की जाए तो यह दिवंगत आत्मा को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इसी भावना के साथ दोनों भाइयों ने यह राशि विद्यालय परिवार को प्रदान की।
विद्यालय परिवार ने परिजनों के इस निर्णय की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया। विद्यालय परिवार के अनुसार शिक्षा के क्षेत्र में किया गया यह सहयोग विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने में सहायक होगा तथा समाज में सकारात्मक संदेश देगा।
परिजनों ने कहा कि स्वर्गीय नंदू देवी की स्मृतियां सदैव परिवार के साथ रहेंगी। उनकी स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग करना उनके लिए गर्व और संतोष का विषय है। इस पहल के माध्यम से मृत्यु भोज जैसी परंपराओं के स्थान पर शिक्षा, सेवा एवं जनहित के कार्यों को बढ़ावा देने का संदेश भी गया है।
इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य प्रताप सिंह राणावत, बंसीलाल बलाई, अनीता जाट, दीपिका गोयल, सूरज कुमार बैरवा सहायक उप निरीक्षक चित्तौड़ पुलिस सहित बैरवा समाज के सामाजिक कार्यकर्ता एवं ग्रामीण मौजूद रहे। सभी ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे समाज के अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणादायी बताया।
कार्यक्रम में स्वर्गीय नंदू देवी बैरवा के पिता सुखदेव जी बैरवा, माता श्रीमती पानी देवी, बहनें कस्तूरी देवी, रामकन्या देवी, शायरी देवी सहित अन्य परिजन उपस्थित रहे।
बड़े भाई और फूफासा को माना प्रेरणास्रोत-
कालू लाल बैरवा ने बताया कि इस नेक कार्य की प्रेरणा उनके बड़े भाई एवं राजस्थान पुलिस में सहायक उप निरीक्षक के पद पर कार्यरत सूरज कुमार बैरवा से मिली। उन्होंने बताया कि वे अपने बड़े भाई सूरज कुमार बैरवा एवं फूफासा स्वर्गीय रामलाल बैरवा, निवासी नेगड़िया कला, चित्तौड़गढ़ को अपना आदर्श मानते हैं।
कालू लाल बैरवा एवं गोपाल बैरवा द्वारा किए गए इस कार्य की समाज के विभिन्न वर्गों में सराहना की जा रही है। लोगों ने कहा कि दोनों भाइयों ने शिक्षा के लिए सहयोग कर सामाजिक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता की अनुकरणीय मिसाल पेश की है।