मंदसौर। गरोठ के ढाबे पर काम करने के बाद शुक्रवार रात घर लौट रहे 50 वर्षीय परमानंद पिता नागूलाल कथिरिया के साथ दर्दनाक हादसा हो गया। सीतामऊ में निर्माणाधीन पुलिया के पास लगे बैरिकेड का सहारा लेते समय वे बैरिकेड समेत करीब 8 से 10 फीट नीचे जा गिरे। नीचे पड़ा करीब साढ़े 3 फीट लंबा लोहे का सरिया उनकी आंख के पास से चेहरे में घुसकर कान के पीछे से बाहर निकल गया।
परमानंद गरोठ में अपने साले के ढाबे पर काम करते हैं। शुक्रवार रात करीब 10 बजे वे बस से सीतामऊ पहुंचे और वहां से पैदल घर जा रहे थे। घर से करीब आधा किलोमीटर पहले निर्माणाधीन पुलिया के पास बैरिकेड लगा था। बैरिकेड का सहारा लेते ही वह उनके साथ नीचे गिर गया और नीचे पड़ा सरिया उनके चेहरे में जा धंसा।
चेहरे में आर-पार फंसा सरिया देख लोग रह गए हैरान-
हादसे के बाद आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और किसी तरह परमानंद को बाहर निकाला। चेहरे में सरिया आर-पार फंसा देखकर लोग हैरान रह गए। सूचना पर पहुंची 108 एंबुलेंस से उन्हें सीतामऊ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें मंदसौर जिला अस्पताल रेफर किया गया, जहां रात करीब 11रू30 बजे उन्हें लाया गया।
जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने गंभीर स्थिति को देखते हुए सरिया निकालने की कोशिश नहीं की। मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ चिकित्सकों को बुलाया गया। सर्जिकल स्पेशलिस्ट डॉ. प्रीति मानावत सहित टीम ने करीब डेढ़ घंटे तक बाहर से संभव उपचार किया। इसके बाद सरिए को बिना छेड़े मरीज को रतलाम मेडिकल कॉलेज रेफर करने का निर्णय लिया गया।
नसों को नुकसान की आशंका, सरिया निकालने की नहीं की गई कोशिश-
डॉक्टरों के अनुसार सरिया आंख के पास से घुसकर चेहरे के अंदर के हिस्सों को नुकसान पहुंचाते हुए कान के पीछे से बाहर निकला था। कान के पीछे निकलने वाली जगह पर करीब 5 से 6 इंच लंबा और गहरा घाव था। सरिया निकालने पर अंदर की नसों एवं अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों को और नुकसान पहुंचने की आशंका के चलते उसे मौके पर ही छोड़कर मरीज को रेफर किया गया।
डॉ. प्रीति मानावत ने बताया कि उनके 21 वर्ष के करियर में इस तरह का मामला पहली बार सामने आया है। करीब साढ़े 3 फीट लंबा आयरन रॉड आंख के पास से कान के पीछे तक फंसा हुआ था। कई हिस्सों और नसों के क्षतिग्रस्त होने की आशंका को देखते हुए मरीज को उच्च चिकित्सा सुविधा के लिए रतलाम मेडिकल कॉलेज भेजा गया।
दर्द से तड़पता रहा परमानंद, डॉक्टरों से सरिया निकालने की लगाता रहा गुहार-
इलाज के दौरान परमानंद दर्द से तड़पते रहे और बार-बार डॉक्टरों से सरिया निकालने की गुहार लगाते रहे। हालांकि गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने सरिया निकालने का प्रयास नहीं किया। जिला अस्पताल में करीब डेढ़ घंटे उपचार के बाद रात करीब 1 बजे उन्हें गंभीर हालत में रतलाम मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया।
बेटे ने बताया- घर से आधा किलोमीटर पहले हुआ हादसा
परमानंद के बेटे प्रवीण ने बताया कि उनके पिता गरोठ में ढाबे पर काम करते हैं और कभी-कभी ही घर आते हैं। शुक्रवार रात वे बस से सीतामऊ पहुंचे थे। इसके बाद पैदल घर जा रहे थे। घर से करीब आधा किलोमीटर पहले निर्माणाधीन पुलिया के पास बैरिकेड लगा था। पिता ने जैसे ही उसका सहारा लिया, वे बैरिकेड के साथ नीचे गिर गए और वहां पड़ा सरिया उनके चेहरे में घुस गया।
हादसे की सूचना मिलने पर प्रवीण मौके पर पहुंचा। वहां लोगों की भीड़ जमा थी। इसके बाद 108 एंबुलेंस की मदद से परमानंद को सीतामऊ अस्पताल ले जाया गया, जहां से उन्हें मंदसौर जिला अस्पताल रेफर किया गया। बाद में गंभीर हालत में रतलाम मेडिकल कॉलेज भेजा गया। रतलाम रवाना किए जाने के समय भी करीब साढ़े 3 फीट लंबा सरिया उनके चेहरे में फंसा हुआ था। फिलहाल उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है।