मंदसौर। वायडी नगर थाना क्षेत्र में कार का शीशा तोड़कर 10 लाख रुपए चोरी करने के मामले में गिरफ्तार किए गए दो आरोपियों को न्यायालय ने दोषमुक्त कर दिया। न्यायालय ने विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों एवं आरोपों पर विचार करने के बाद दोनों आरोपियों को दोषमुक्त करने का आदेश दिया। आरोपियों की ओर से अधिवक्ता राहुल तंवर ने पैरवी की।
बैंक से 18 लाख रुपए निकालने के बाद हुई थी चोरी-
मामला 25 फरवरी 2026 का है। पुलिस के अनुसार, बोलखेड़ा निवासी तुलसीराम पिता गोवर्धनलाल धनोतिया ने वायडी नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया था कि उन्होंने IDFC फर्स्ट बैंक और HDFC बैंक से कुल 18 लाख रुपए निकाले थे।
इसके बाद घर के बाहर खड़ी कार का शीशा तोड़कर अज्ञात व्यक्ति कार में रखे 10 लाख रुपए चोरी कर ले गए थे। शिकायत के आधार पर पुलिस ने अपराध क्रमांक 103/2026 दर्ज कर जांच शुरू की थी।
पुलिस ने कर्नाटक से दो आरोपियों को किया था गिरफ्तार-
पुलिस ने जांच के दौरान कर्नाटक निवासी सुनील उर्फ बाबू उर्फ बालू और भरत उर्फ विष्णु को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने उस समय दोनों आरोपियों के कब्जे से चोरी के 10 लाख रुपए और वारदात में इस्तेमाल मोटरसाइकिल बरामद करने का दावा किया था।
जांच के दौरान फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल सहित अन्य आरोपों से संबंधित धाराएं भी जोड़ी गई थीं। पुलिस के अनुसार, बैंक, घटनास्थल एवं आरोपियों के संभावित भागने वाले मार्गों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। तकनीकी जांच के आधार पर आरोपियों की पहचान होने का दावा किया गया। इसके बाद राजस्थान पुलिस की मदद से चित्तौड़गढ़ जिले के बस्सी थाना क्षेत्र से दोनों को गिरफ्तार किया गया था।
रेकी कर वारदात करने का पुलिस ने किया था दावा-
पुलिस के अनुसार, आरोपी मोटरसाइकिल चोरी करने के बाद वारदात वाले क्षेत्र में फर्जी नंबर प्लेट का इस्तेमाल करते थे। इसके बाद बैंक या अन्य वित्तीय संस्थानों से नकदी निकालने वाले लोगों की रेकी कर मौका मिलने पर वाहन का शीशा तोड़कर नकदी चोरी करते थे। पुलिस ने आरोपियों से जुड़े ऐसे ही तरीके से वारदात करने का दावा किया था। हालांकि, विचारण के दौरान न्यायालय ने अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और आरोपों पर विचार करने के बाद दोनों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।
बचाव पक्ष ने साक्ष्यों का किया विधिक परीक्षण-
आरोपियों की ओर से अधिवक्ता राहुल तंवर ने न्यायालय में पैरवी की। बचाव पक्ष ने अभियोजन की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और आरोपों का विधिक परीक्षण करते हुए न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखा।
अधिवक्ता राहुल तंवर ने बताया कि आपराधिक मामलों में आरोपों को विधि एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर साबित करने का दायित्व अभियोजन पक्ष पर होता है। मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने दोनों आरोपियों को लगाए गए आरोपों से दोषमुक्त करने का आदेश दिया।