जीरन। “दिवाली में अली बसे, राम बसे रमजान, ऐसा होना चाहिए अपना हिंदुस्तान...” शायर की इन पंक्तियों की भावना शनिवार को जीरन की सरजमीं पर साकार होती दिखाई दी। जलझूलनी एकादशी के अवसर पर नगर में निकले विशाल बेवाण जुलूस के दौरान हिंदू-मुस्लिम एकता और आपसी सौहार्द का संदेश देखने को मिला।
जलझूलनी एकादशी पर पूरे जीरन में उत्साह का माहौल रहा। विभिन्न मंदिरों से भगवान के डोल-बेवाण बैंड-बाजों के साथ नगर भ्रमण पर निकले। जैसे ही जुलूस मस्जिद के समीप पहुंचा, मुस्लिम समाज के लोगों ने आगे बढ़कर भगवान के बेवाण का स्वागत किया।
मुस्लिम समाजजनों ने जुलूस में शामिल हिंदू समाज के लोगों को गले मिलकर जलझूलनी एकादशी की शुभकामनाएं दीं। बेवाण में विराजित भगवान को पुष्पमाला एवं प्रसाद अर्पित कर श्रद्धा व्यक्त की गई। इस दौरान मुस्लिम समाज की ओर से जुलूस में शामिल श्रद्धालुओं को प्रसाद भी वितरित किया गया।
मस्जिद की छत से हुई पुष्पवर्षा-
जुलूस के मस्जिद के सामने पहुंचने पर वहां मौजूद मुस्लिम समाजजनों ने छत से भगवान के बेवाण पर पुष्पवर्षा की। सड़क के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और इस दृश्य ने आपसी भाईचारे एवं सद्भाव का संदेश दिया।
जलझूलनी एकादशी के अवसर पर जीरन में देखने को मिला यह दृश्य नगर के सामाजिक सौहार्द की मिसाल के रूप में सामने आया। पर्व के दौरान दोनों समुदायों के लोगों ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं देकर भाईचारे और आपसी सम्मान का संदेश दिया।