चित्तौड़गढ़। ब्रह्माकुमारी प्रताप नगर सेवा केंद्र पर नवरात्रि का आध्यात्मिक रहस्य बताते हुए राज योगिनी आशा दीदी ने बताया कि आज नवरात्रि का दूसरा दिन मां दुर्गा की ब्रह्मचारिणी रूप की पूजा होती है। ब्रह्मचारी अर्थात ब्रह्मचर्य और तप का आचरण करने वाली। तप करने के लिए ब्रह्मचर्य और पवित्रता अति आवश्यक है। उन्होंने बताया कि इनके एक हाथ में माला जो परमात्मा शिव का जाप अर्थात मनमना भव निरंतर स्मृति में रहने का प्रतीक है और दूसरे हाथ में कमंडल है जो की सत्य ज्ञान को पहले स्वयं में धारण कर फिर औरों को प्रदान करने का प्रतीक है। मां दुर्गा के इस रूप से हमें संपूर्ण पवित्रता द्वारा तपस्वी जीवन और सत्य ज्ञान के श्रेष्ठ जीवन बनाने की प्रेरणा मिलती है।
उन्होंने बताया की अष्टमी के दिन 16 कन्याओं का पूजन कर उनका श्रृंगार कर उनको भोग लगाया जाएगा व उनकी पूजा अर्चना की जाएगी। नवमी के दिन माता बहनों को श्रृंगार कर उनका सम्मान किया जाएगा। उन्होंने बताया की हर नारी शक्ति शिव शक्ति का प्रतीक है नारी शक्ति शिव से प्रकट हुई शक्तियां हैं। इसी प्रकार प्रतिदिन सेवा केंद्र पर राजयोग तपस्या का आयोजन भी किया जा रहा है। ब्रह्म मुहूर्त से ही सभी विशेष मेडिटेशन के द्वारा अपनी खोई हुई शक्तियां जागृत करते है और अपनी समस्याओं का समाधान पाते है।