चित्तौड़गढ़। गांधीनगर स्थित नानू नवकार भवन में धर्मानुरागियों से रूबरू होते हुए शांतक्रांति संघ की विदूषी महासती शीलप्रभा ने बताया कि मोह माया और कपट झाल का दूषित आचरण करते हुए हम अरिहंत बनने की दिशा में कदम नहीं बढ़ा सकते। जो अंदर और बाहर में एक जैसा हो, जिसकी कथनी और करनी में एकरूपता हो, जो प्रतिक्रिया रहित होकर अपनी इन्द्रियों एवम् कषाय का दमन करने वाला हो एवम् जो अपनी इच्छाओं का शमन करने वाला हो , वो इंसान मानव से महामानव (अरिहंत) बनने की योग्यता प्राप्त करने वाला बन जाता है। हम सब भी अरिहंत बनना चाहते हैं अतः हमें भी अपनी कषाय जनित दूषित प्रवर्तियों को धीरे धीरे कम करते हुए पूर्ण रूप से छोड़ने की तरफ़ आगे बढ़ना चाहिए और ज्ञान दर्शन चारित्र की शुद्ध आराधना करने हेतु प्रति पल सजग रहना चाहिए। इससे पूर्व साध्वी सत्यप्रभा ने उत्तराध्ययन सूत्र के 15 वे अध्ययन का वांचन करने के बाद बताया कि साधक और आराधक को अनासक्त भाव रखते हुए अल्प परिचय वाला होना चाहिए। गुरु सप्ताह महोत्सव के छटे दिवस आज़ नवकार मंत्र का सामूहिक जाप किया गया तथा मिठाई के त्याग बाबत लक्ष्य रखा गया। धर्म सभा में आज़ चार्तुमास काल में अब तक तेला तप एवम् इससे बड़ी तपस्या करने वाली त्यागी आत्माओं का बहुमान किया गया। साध्वी रत्ना राजश्री जी म सा ने विभिन्न प्रत्याख्यान कराने के बाद मंगल पाठ सुनाया। मोहन लाल पोखरना, सुनीता रांका एवम् पारस मल सोनी ने विजय गुरुदेव का गुणगान किया। संचालन मंत्री इंद्रेश कोठारी ने किया।