चित्तौड़गढ़। गांधीनगर स्थित नानू नवकार भवन में आयोजित धर्म सभा में चतुर्मासिक प्रवचन करते हुए शांतक्रांति संघ की विदूषी महासती शीलप्रभा ने कहा कि ज्ञानीयों के अनुसार सभी का जीवन क्षणभंगुर है और प्रत्येक क्षण मौत हमारा पीछा कर रही है , ना जाने कौन सा पल हमारी मौत का पैगाम लेकर आ जाए और ना चाहते हुए भी हम यहां से विदा हो जाएं इसलिए जीवन की चंचलता को जान कर और समझ कर प्रमाद अवस्था को निरंतर कम करने का पुरुषार्थ करते रहें। प्रभु महावीर स्वामी ने भी अपने अंतेवासी शिष्य गौतम को सम्बोधित करते हुए हर बार पहले यही कहा है कि है गौतम धर्म कार्य में क्षण मात्र का प्रमाद करना भी उचित नहीं है । प्रभु महावीर स्वामी की इस छोटे सी शिक्षा का यदि हम सजगता से पालन करने का दृढ़ संकल्प करेंगे तो आध्यात्मिक विकास के सबसे बड़े शत्रु आलस्य प्रमाद को पछाड़ते हुए वीर से महावीर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकेगें। इससे पूर्व साध्वी सत्यप्रभा ने उत्तराध्ययन सूत्र के 14 वे अध्ययन का वांचन करने के बाद बताया कि ष्खणमिथ सुखा, बहुकाल दुखाष् अर्थात सांसारिक काम भोग विलास के क्षणिक सुख आगे बहुत काल तक दुःख देने वाले हैं अतः हमें संसार की असारता का चिंतन करते हुए इनसे बचना चाहिए। महासती पुण्यप्रिया ने ठानांग सूत्र के 10 वे ठाणे में वर्णित 10 प्रकार के मुंडन के विषय में जानकारी दी। गुरु सप्ताह महोत्सव के पांचवे दिन को आज़ सामूहिक दया/संवर दिवस के रूप में मनाते हुए उपर से नमक नहीं लेने का लक्ष्य रखा गया । साध्वी रत्ना राजश्री जी म सा ने विभिन्न प्रत्याख्यान कराने के बाद मंगल पाठ सुनाया। संचालन संघ मंत्री इंद्रेश कोठारी ने किया।