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October 8, 2024, 11:20 am
BIG REPORT : दशहरा पर नए शहर आएगी बाबा महाकाल की पालकी, शमी पूजन कर वापस मंदिर लौटेगी वर्ष में एक बार फ्रीगंज आने वाली सवारी, पढे़ खबर 

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उज्जैन। विजया दशमी पर्व के अवसर पर 12 अक्टूबर शनिवार को शाम चार बजे श्री महाकालेश्वर मंदिर से बाबा महाकाल की सवारी नए शहर में भ्रमण के लिए आएगी। चांदी की पालकी में भगवान महाकाल विराजित होकर विभिन्न मा से होकर दशहरा मैदान पहुंचेंगे। यहां पर शमी पूजन के बाद सवारी वापस महाकाल मंदिर लौट जाएगी।


दशहरा पर्व पर वर्ष में एक बार शाम को 4 बजे राजाधिराज श्री महाकाल नए शहर में भी प्रजा को दर्शन देने के लिए चांदी की पालकी में सवार होकर आते है। 12 अक्टूबर को मंदिर के सभा मंडप में पूजन-अर्चन के बाद सवारी दशहरा मैदान के लिए रवाना होगी। मंदिर परिसर के बाहर सशस्त्र पुलिस बल के जवान राजाधिराज महाकाल को सलामी देगें।


सवारी के साथ पुलिस बैंड, पुलिस घुड़सवार दल, सशस्त्र पुलिस के जवान, मंदिर के पंडे-पुजारी, अधिकारी-कर्मचारी व भक्त रहेंगे। हालांकि इस बार संभव है कि राजसी स्वरूप में सवारी निकालने के लिए चुनिंदा भजन मंडलियों को भी शामिल किया जाए। सवारी शहर के विभिन्न मार्गों से होकर दशहरा मैदान पहुंचेगी।


यहां पर रावण दहन के पूर्व दशहरा मैदान पर बाबा महाकाल का विधि-विधान से पूजन के बाद शमी वृक्ष का पूजन होगा। इसके बाद सवारी पुनरू मंदिर के लिए रवाना हो जाएगी। दशहरा मैदान पर पूजन की व्यवस्था मंदिर समिति द्वारा ही की जाती है।


इन मार्गों से होकर निकलेगी सवारी
श्री महाकालेश्वर मंदिर से शुरू होकर सवारी महाकाल घाटी, पटनी बाजार, गोपाल मंदिर, छोटा सराफा, सती गेट, कंठाल, नई सड़क, दौलतगंज, मालीपुरा होती हुई देवास गेट, चामुंडा माता चौराहा से ओवर ब्रिज होते हुए, फ्रीगंज टावर चौक, माधव नगर चिकित्सालय के सामने पुलिस कंट्रोल रूम होकर दशहरा मैदान पहुंचेगी। यहां पर पूजन के बाद सवारी वापसी में कंट्रोल रूम के सामने से घास मंडी चौराहा, शहीद पार्क, टावर चौक फ्रीगंज ओवर ब्रिज से संख्या राजे धर्मशाला, देवास गेट, दौलतगंज, तोपखाना से महाकाल घाटी होकर वापस मंदिर पहुंचेगी।


महाकाल मंदिर के शिखर पर चढ़ेगी नई ध्वजा
विजया दशमी के अवसर पर श्री महाकालेश्वर मंदिर के शिखर पर ध्वजा बदली जाएगी। प्रतिवर्ष दशहरा के अवसर पर मंदिर परिसर में स्थित श्री पंचायती महा निर्वाणी अखाड़ा द्वारा ध्वजा का पूजन कर शिखर पर ध्वजा बदली जाती है। तहसील कार्यालय नई ध्वजा, रस्सी, बांस, पूजन सामग्री व दक्षिणा उपलब्ध कराता है। दशहरा पर्व पर सुबह सात बजे आरती के बाद नई ध्वजा का पूजन कर शिखर पर फहराई जाती है।


इसलिए दशहरा पर शमी पूजन में शामिल होते हैं बाबा महाकाल
श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पं. महेश पुजारी ने बताया कि भगवान महाकाल उज्जैन नगरी के राजा हैं। राजा होने के नाते जितने भी पर्व-त्योहार होते है, उसमें राजा की उपस्थिति अनिवार्य होती है। जिस तरह से श्रावण मास, कार्तिक मास में पुराने शहर में सवारी के रूप में भगवान की उपस्थिति नगर में देखते हैं। इसी तरह विजय दशमी पर्व दशहरा पर भी भगवान महाकाल की उपस्थिति नगर में रहती है। पहले उज्जैन का राज्य ग्वालियर राजघराने से चलता था। दशहरा पर्व पर जब भी शमी पूजा और शस्त्र पूजा होती थी, उसमें ग्वालियर के राजा आते थे। लेकिन भगवान महाकाल अवंतिका के राजा हैं। इसलिए उन्हें आमंत्रित किया जाता था।


नया शहर जिसे आजकल फ्रीगंज कहा जाता है। लेकिन फ्रीगंज पुराना शहर ही रहा है और यही नगर की अंतिम सीमा रही है। भगवान महाकाल की सवारी साल में एक बार दशहरा मैदान तक सवारी के रूप में आती है। वहां पर राजा शस्त्र पूजा, शमी पूजा करते थे तो सानिध्य उपस्थिति भगवान महाकाल की मानी जाती थी। भगवान महाकाल के सानिध्य में शस्त्र पूजन, शमी पूजा होने के बाद वहां उपस्थित लोग शमी वृक्ष से शमी की पत्तियां लूटते थे और घरों में ले जाकर मित्रों को शमी की पत्तियों को स्वर्ण मानकर एक-दूसरे को दिया जाता था। यह परंपरा अनादि समय से चली आ रही है। इस परंपरा का निर्वाहन आज भी मंदिर के पुजारी-पुरोहितों द्वारा किया जा रहा है।

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