चित्तौड़गढ़। गांधीनगर स्थित नानू नवकार भवन में धर्मानुरागियों को सम्बोधित करते हुए शांतक्रांति संघ की विदूषी महासती शीलप्रभा ने कहा कि जिनेश्वर भगवन्तों की वाणी हमें सदा दूसरों का आदर सम्मान करना सिखाती है। हमें कभी भी हल्की बोली नहीं बोलनी चाहिए और किसी का हंसी मज़ाक नहीं उड़ाना चाहिए। हम दूसरों से जैसा व्यवहार चाहते हैं, वैसा ही हमें दूसरों के साथ करना चाहिए। गलत ढंग से कभी दूसरों पर नहीं हंसना चाहिए क्योंकि कभी कभी गलत तरीके की हंसी के भयानक परिणाम हमारे सामने आ जाते हैं, जिस कारण भयावह स्थितियां पैदा हो जाती है और परिवारिक एवं सामाजिक रिश्तों में कड़वाहट आने लगती है अतः हमें समय की नज़ाकत को देखते हुए अपनी हंसी का विवेकपूर्ण तरीके से इस्तेमाल करना चाहिए।
इससे पूर्व साध्वी सत्यप्रभा ने उत्तराध्ययन सूत्र के माध्यम से बताया कि सुखी बनने के लिए त्याग करो, शांति हेतु राग भाव घटाओ, आत्मार्थी बनने के लिए वैराग्य भाव बढ़ाओ और भय रहित(अभय )रहने हेतु सभी प्राणियों की सुरक्षा करो। महासती पुण्यप्रिया ने ठानांग सूत्र के चौथे ठाणे में वर्णित ऊर्ध्व लोक, मध्य लोक एवम् अधो लोक के अंधकार एवम् उद्योत की जानकारी दी। आज़ धर्म सभा में रायपुर छत्तीसगढ़ से विश्वास श्रीश्रीमाल के साथ महासती पुण्यप्रिया जी के सांसारिक पुत्र प्रवेश एवम् प्रतीक तथा अन्य सुज्ञजन उपस्थित रहे। साध्वी रत्ना राजश्री जी मसा ने विभिन्न प्रत्याख्यान कराने के बाद मंगल पाठ सुनाया। संचालन संघ मंत्री इंद्रेश कोठारी ने किया।