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October 10, 2024, 12:28 pm
KHABAR : उज्जैन में दो दिन मनाया जाएगा अष्टमी पर्वरूआज दोपहर 12: 20 से शुक्रवार दोपहर 12: 22 तक रहेगी अष्टमी तिथि, कल होगी नगर पूजा, पढे़ खबर

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उज्जैन। शारदीय नवरात्रि पर्व के अंतिम दो दिन देवी भगवती और कुल देवी का पूजन घरों में किया जाता है। इस बार की नवरात्रि पूरे नौ दिन की है, लेकिन अष्टमी और नवमी तिथि का पूजन एक ही दिन होगा। अष्टमी तिथि गुरुवार को दोपहर 12ः30 से प्रारंभ होकर अगले दिन शुक्रवार को दोपहर 12: 22 बजे तक रहेगी। इसके बाद नवमी तिथि लगेगी। महा-अष्टमी पूजन के लिए सभी घरों में अपनी कुल परंपरा अनुसार सुबह या संध्या के समय पूजन का महत्व है। वहीं देवी मंदिरों में भी महा-अष्टमी और नवमी पर पूजन अनुष्ठान किए जाएंगे।

पं. अमर डिब्बावाला ने बताया कि सनातन की शक्ति का पर्व अश्विन शुक्ल प्रतिपदा से अश्विन शुक्ल नवमी तक माना जाता है। आदि शक्ति माता जगदंबा का जिनके कई नाम है, इनकी साधना का उत्सव पर्व काल अश्विन नवरात्रि माना जाता है। इस बार नवरात्र पूरे 9 दिन के हैं। हालांकि अष्टमी और नवमी तिथि का पूजन एक दिन रहेगा। ऐसे में जिन परिवारों में कुल परंपरा के अनुसार सुबह या शाम को पूजन किया जाता है, वे तिथि अनुसार पूजन करते हैं।


अष्टमी और नवमी तिथि का यह है समय
अष्टमी तिथि 10 अक्टूबर गुरुवार को दोपहर 12ः30 बजे से प्रारंभ हो जाएगी जो 11 अक्टूबर शुक्रवार को दोपहर 12ः22 बजे तक रहेगी।
इसी तरह नवमी तिथि 11 अक्टूबर को दोपहर 12ः22 बजे के बाद प्रारंभ होकर अगले दिन 12 अक्टूबर शनिवार को सुबह 11 बजे तक रहेगी।
इसके बाद दशमी तिथि लगेगी। इसी दिन दशहरा पर्व भी मनाया जाएगा।
नवमी पूजन के लिए जिन घरों में दोपहर से शाम तक किया जाता है वे 11 अक्टूबर को पूजन कर सकते हैं।
जिन घरों में नवमी पूजन प्रातरू किया जाता है वे परिवार 12 अक्टूबर की सुबह 11 बजे के पहले तक कुल परंपरा अनुसार पूजन कर सकते हैं।
अष्टमी-नवमी तिथि पर यह है कन्या पूजन का महत्व


नवरात्रि में मां दुर्गा की नौ दिनों तक साधना पूजन किया जाता है।
अष्टमी और नवमी तिथि पर मंदिरों में नौ दिवसीय अनुष्ठान की पूर्णाहुति होती है। विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
घरों में परंपरा के अनुसार कुल देवी का पूजन भी होता है।
देवी पूजा के साथ ही कन्या पूजन का भी विशेष महत्व है।
मान्यता है कि इस दिन जो व्यक्ति कन्या पूजन करता है उसके घर में सुख समृद्धि का वास होता है और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
महा-अष्टमी पर मां दुर्गा के महागौरी स्वरूप की पूजा की जाती है। मां महागौरी को अन्न पूर्णा का स्वरुप माना जाता है।

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