चीताखेड़ा। शनिवार को गांव चीताखेडा में धर्म ग्रन्थों पर आधारित पुरानी परम्परागतानुसार धार्मिक रीति के अनुसार मनाया गया दशहरा पर्व। नौ दिनों तक शक्ति की आराधना के बाद दशहरे पर गांव के सभी दुर्गा माता मंदिरों पर पूर्णाहुति हवन पूजन हुए। साथ ही गांव के विभिन्न मंदिरों से वाड़ी उठाई गई। नवरात्र के पहले दिन गांव के सभी पुराने धार्मिक स्थलों देवी एवं खाखरदेव, देवनारायण मंदिरों पर परंपरानुसार जवारे बोए जाते हैं जिनका अंतिम दिन विसर्जन किया जाता है।
मंदिरों के भोपाओं (पुजारी) की उपस्थिति में निकालें गए चल समारोह में हजारों श्रद्धालुओं ने शामिल होकर धर्म लाभ लिया। गांव में इस अवसर पर सभी घटस्थापना वाले स्थलों से बारी बारी से गांव के विभिन्न मार्गों से इनका चल समारोह निकाला गया। ऐसा माना जाता है कि जिस साल जवारे जितने बड़े होते हैं उस साल फसल उतनी ही अच्छी होती है।
सुख-समृद्धि के लिए डलवाते है झाड़ी-
शितला माता जी (भेंसाशरी) माता जी मंदिर से वाड़ी जवारे विसर्जन चल समारोह प्रारंभ होता है। जिसमें कई श्रृद्धालु भोपाओं से सुख-समृद्धि, शांति, अपने बच्चों एवं परिवार पर बिमारी का कोई प्रकोप या विग्न नहीं आवें इसके लिए मोर पंख एवं नीम की पत्तियों से झाड़ी डलवाते है।
दशहरे के पूर्व नों दिनों तक शारदेय नवरात्र काल में दशों दिशाओं में देवी मां की शक्ति के संचारित होता हैं ,दशमी की तिथि पर दिशाएं देवी मां के नियंत्रण में आ जाती हैं ,अर्थात दिशाओं पर विजय प्राप्त होती हैं,इसी कारण इसे दशहरा कहते हैं।
9दिवसीय शारदेय नवरात्र के पावन पर्व पर देव -देवी स्थलों पर 9दिनो तक पुजा अर्चना की गई एवं वाडी(जवारे) बोई गई,उन्हीं स्थलों से अष्ठमी -नवमी एक ही दिन को ढोल ढमाकों के साथ नवडता उठाई गई।इस मौके पर (भोपाओं) पुजारीयों द्वारा भाव भी आए।ग्रामीणों ने भभूत (विभूति) और शुभ कार्य के लिए आका भी लिए गए।दशहरा पर्व सभी स्थानीय प्रमुख धार्मिक देवी देवता स्थलों देवी और भेरुजी के स्थान से भोपाजी अपने स्वाग में एक हाथ में अग्नि का खप्पर तो दुसरे हाथ में तलवार लिए तो किसी के हाथ में मोरपंख तो किसी के साकल लिए भाव के रुप मे मुख्य मार्गों से होते हुए नीम चौक पहुंचे श्रद्वालुओं ने आर्शिवाद दिया । इस आयोजन में पुलिस सहायता केंद्र चौकी प्रभारी विरेन्द्र सिंह बिसेन ने अपनी पुलिस टीम ने व्यवस्था में पूरी तरह मुस्तैद रहे। गांव में स्थित सभी स्थानों से पुजारी को ढोल ढमाकों के साथ भाव के साथ दशहरे के दिन शनिवार को नीम चौक पर एकत्रित हुए जहां पर धर्म ग्रंथों पर आधारित कापरिया चौर और देवी देवताओ के स्वांग में खेल का मंचन किया गया ।बाद में (जलसा) भव्य शोभायात्रा पुरानी पंचायत कार्यालय के पास पहुंचा जहां पर देवासुर संग्राम की लडाई पर आधारित महिसासुर(-हाथिका डाडमा) और देवी देवताओं के स्वाग के रुप में भोपा के बीच युद्ध का मंचन किया गया।जिसे देखने के लिए हजारों ग्रामीण प्रत्यक्षदर्शी साक्षी बनें हैं।पश्चात जवारे वाडी सरवरे पहुंच कर विसर्जित किया गया। इसी के साथ शारदेय नवरात्र के नौ दिवसीय कार्यक्रम का समापन हुआ।