चित्तौड़गढ़। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना दिवस विजयदशमी पर्व पर पथ संचलन निकाला गया। नगर व खंड के स्वयंसेवक गणवेश में लयबद्ध तरीके से अनुशासन और समयबद्धता के साथ घोष की स्वर लहरियों के वादन पर कदम से कदम मिलाकर चल रहे थे। पथ संचलन में शामिल स्वयंसेवकों का मार्ग में कई जगह सामाजिक व स्वयं सेवी संगठनों के पदाधिकारी ने पुष्प वर्षा द्वारा स्वागत किया गया। जिला संघ चालक अनिरुद्ध सिंह भाटी ने बताया कि चित्तौड़ नगर के संघ रचना अनुसार 18 बस्तियां में लगने वाली 34 शाखाओं व नगर के समीप गांव में लगने वाली शाखाओं से भी स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया।
संचलन की शुरुआत से पूर्व स्वयंसेवक दोपहर 3.00 बजे से ही महाराणा प्रताप राजकीय महाविद्यालय मैं एकत्रित होने लगे। बाद में सभी को वाहिनी रचना में खड़ा किया। इसके बाद संघ की प्रार्थना नमस्ते सदा वत्सलेश् का गान हुआ। 4.15 बजे संचलन शुरू हुआ। संचलन में स्वयंसेवकों ने 60 मिनट में 5 किलोमीटर का सफर तय किया । घोष की धुन पर सधे कदमों से स्वयंसेवक मार्गाे से गुजरे तो हर जगह शहर वासियों एवं हर जाति बिरादरी बिरादरियों के साथ-साथ जगह-जगह फूल बरसा कर समाज जनों ने स्वागत किया। विभिन्न मार्गाे से होकर पुनः महाराणा प्रताप राजकीय महाविद्यालय पहुंचा एवं वहा विजयदशमी उत्सव में हुआ जिसमे मुख्य अतिथि हनुमान सिंह राठौड़ (लेखक व समाजसेवी) थे।
उत्सव में शस्त्र पूजन के बाद मुख्य अतिथि ने बताया कि कल अर्थात विजयदशमी के दिन 1982 में विक्रम संवत के संघ की स्थापना 2082 की विजयदशमी मनाएंगे तब हम कह सकेंगे की संघ शतायु हो गया है। ये 100 वर्ष जीने की हिंदुत्व कल्पना वेद अनुसार ष्कार्वण्य कर्मणी जीजेवे शतमष् 100 वर्ष जीना पर कर्म करते हुऐ। संघ कार्य यह है कि जो इस देश का हिंदुत्व हैं। जो हिंदू जीवन पद्धति को मानने वाला हिंदू समाज है वही इस हिंदू राष्ट्र को पुनः अपने शिखर पर पहुंचा सकता है।
संघ अपने शताब्दी वर्ष में कोई बड़ा आयोजन नहीं करने जा रहा है वह पंच परिवर्तन के माध्यम से समाज परिवर्तन का लक्ष्य लेकर चल रहा है इसी के द्वारा हिंदू राष्ट्र की उन्नति होगी ऐसा संघ का मानना है यही संघ का लक्ष्य है। संघ किसी की प्रतिक्रिया में प्रारंभ नहीं हुआ यह ध्यान रखना चाहिए हिंदू समाज की जो विस्मती की अवस्था थी उसे हिंदू समाज को निकाल कर फिर से खड़ा करने के लिए जो प्रयत्न हमने 1925 से आरंभ किए थे वह फलीपुत होते दिख रहे हैं।