नीमच। मजहबे इस्लाम में शराब हराम है। इसके बावजूद हमारे समाज के नौजवान शराब को हराम ना समझ कर मौज-मस्ती की चीज समझ रहे हैं। इसमें परिवार के साथ साथ समाज भी जिम्मेदार है। समाज की सामाजिक संस्था जैसे अंजुमन या सामाजिक संगठन बिरादरी के संगठन को ठोस कदम उठाने चाहिए शराब का आदि व्यक्ति का सामाजिक बहिष्कार करना होगा। नीमच की घटना है जो सच साबित हो रही है कि शाहरुख शाकिर ने ढाबे पर खाना खाते समय दारू पीने लगा हिन्दू ढाबे वाले के मना करने पर दारू की बोतल फोड़कर जानलेवा हमला किया। पुलिस ने गिरफ्तार किया, जिससे शहर का माहौल तो नहीं बिगड़ा परन्तु शाहरुख शाकिर जेल गए। एक व्यक्ति ज़िन्दगी और मौत की जंग लड रहा है।
समाज सेवी मो. शकील कुरैशी ने कहा कि हमने अपनी नैतिक जिम्मेदारी नहीं समझी तो कल हमारा भी परिवार बर्बाद होगा समाज के जिम्मेदार संगठन जागरूक समाज सेवी लोगों के द्वारा ठोस कदम उठाने होंगे अगर इसी तरह के हालात समाज मे होते रहे तो वो दिन दूर नहीं जब समाज का पतन निश्चित है हमें ऐसी कारगुजारियों पर रोक लगाना है तो कम से कम शराब सेवन करने वालो का आर्थिक सामाजिक बहिष्कार करना होगा ढौस निर्णय तो लेना हौगा तभी हम मजहब और समाज का भला कर पाएंगे।