चित्तौडगढ। नृत्य हमारे लिए भी पूजा है। नृत्य करते समय आपस की दूरी खत्म हो जाती है। ऐसा लगता है आत्मा की परमात्मा से बातचीत करवाने के लिए शरीर तो बस माध्यम है। यही भाव मीरा के थे। उनकी कृपा से ही हमें आज यहां प्रस्तुति देने का अवसर मिला है। मीरा महोत्सव में मीरा नृत्य नाटिका मेरे तो गिरधर गोपाल की प्रस्तुति देने आई कलानेत्री डॉ विजया शर्मा ने यह बात कही। उनकी प्रस्तुति आज शाम इंदिरा प्रियदर्शन ऑडिटोरियम में होगी। कत्थक के रायगढ़ घराने की नृत्यांगना विजया ने कहा कि मीरा की तरह वह भी नृत्य में आध्यात्म को देखती है। अपने गुरू का ऋण उतारने के लिए वह कई युवतियों को नृत्य का निशुल्क प्रशिक्षण भी दे रही है। वह ढाई साल की उम्र की थी, तब से स्टेज पर है। 54 साल की इस यात्रा में वृंदावन, अयोध्या आदि के साथ विदेशों में प्रस्तुति दी है। इस नृत्य नाटिका की स्क्रीप्ट उनकी बड़ी बहिन राजकुमारी शर्मा और विवके सावरेकर ने लिखी है। उनकी भतीजी भार्गवी भी इस नाटिका में मीरा के बचपन की भूमिका में है।
ग्रैमी अवार्डी विधि की प्रस्तुति कल-
ग्रैमी, ग्लोबल इंडियन म्यूजिक जैसे अवार्ड से सम्मानित आकाशवाणी की ए ग्रेड कलाकार विधि शर्मा भी शुक्रवार सुबह मीरा मंदिर और शाम को इंदिरा प्रियदर्शनी ऑडिटोरियम में भजनों की प्रस्तुति देगी।