चित्तौड़गढ़। महाकाव्य रामायण के रचयिता आदिकवि महर्षि वाल्मीकि के प्रकटोत्सव के अवसर पर वाल्मीकि समाज ने महर्षि वाल्मीकि जी की तस्वीर पर पुष्पांजली अर्पित कर तथा गौशाला में गायों को हरा चारा (रजका) खिलाकर गौ सेवा कर सादगीपूर्वक महर्षि वाल्मीकि का जन्मोत्सव मनाया।
इस अवसर पर वक्ताओं ने महर्षि वाल्मीकि के जीवन पर प्रकाश डाला तथा इनके आदर्शों एवं इनके बताए हुए मार्ग पर चलने का आह्वान किया। महर्षि वाल्मीकि ने भगवान राम के जन्म से पूर्व ही रामायण की रचना कर अपनी दिव्य दृष्टि का परिचय दिया। इस अवसर पर कई वक्ताओं ने समाज में शिक्षा का अलख जगाने का भी आह्वान किया।
इस अवसर पर रणजीत लोठ, विश्वनाथ टांक, दिलीप बेनीवाल, राजेश लोठ, प्रो. निर्मल देसाई, राजेश कंडारा, भेरूलाल कोदली, प्रभुलाल कंडारा, कैलाश लोठ, प्रभुलाल घारू, प्रहलाद बुरठ, ललित टांक, मनोज लोठ, बीएल घारू जिंक, रणजीत घारू, शिव कोदली, गोपेश कोदली, अनिल बारेसा, विनोद देसाई, राजेन्द्र कोदली, सुभाष घारू, विष्णु लोठ, युवराज घारू, राकेश घारू, जगदीश टांक, शंकर लोठ, अरूण लोठ, मनीष टांक, अनिल लोठ, अजय मल्होत्रा, अजय लोठ, पंकज लोठ, सत्यनारायण चनाल, महेश छपरीबंद, विनोद टांक, सुरेन्द्र बुरठ, नितेश घारू, भेरू गेंगट, सूरज टांक, रोहित घावरी, आकाश चनाल, रोहित गोरण सहित कई वाल्मीकि समाजजन उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन रणजीत लोठ ने किया। आभार दिलीप बेनीवाल ने व्यक्त किया। यह जानकारी अखिल भारतीय वाल्मीकि महासभा के जिलाध्यक्ष राजेश लोठ ने दी।