चित्तौड़गढ़। गांधीनगर स्थित नानू नवकार भवन में आयोजित धर्मसभा में शांतक्रांति संघ की विदुषी महासती साध्वी रत्ना राज श्री मसा ने कहा कि आज हम सब यहां पर आचार्य नानेश का पुण्य स्मरण दिवस एवं वर्तमान आचार्य विजयराज मसा का पदावरोहण दिवस मनाने के लिए एकत्रित हुए हैं। आचार्य नानेश बचपन से ही वैराग्य भावनाओं से ओतप्रोत होकर देव गुरु धर्म के प्रति समर्पित एवं दृढ श्रद्धावान थे। संयम अंगीकार करने के बाद वे निरंतर साधक से महासाधक बनने की दिशा में गतिमान रहते हुए बाद में आचार्य पद को शुशोभित करने के साथ संघ और समाज को जिनशासन के प्रति श्रद्धावान बनने हेतु जागरूक करते रहे वे आगम मर्मज्ञ होकर प्रखर प्रतिभा संपन्न तथा अनुशासनप्रिय होने के साथ जन जन के प्रिय बन गए थे एवं जैनेतऱ बलाई समाज में व्याप्त दुर्व्यसनो को दूर करने हेतु उन्होंने धर्मपाल प्रवर्ती की शुरुआत करके उनको मांस, मदिरा सेवन से होने वाले नुकसान बता कर छोड़ने हेतु समझाइश की जिससे रतलाम के आस पास के क्षेत्र में कई कई बलाई परिवारों ने जीवन भर के लिए इस दुर्व्यसन को छोड़ दिया और सब धर्मपाल जैन बन कर जिन धर्म की साधना आराधना में संलग्न होकर आज सुखी जीवन जी रहे हैं। आचार्य नानेश समता दर्शन के प्रणेता एवं समीक्षण ध्यान योगी होकर उनकी गुण गौरव गाथा चहूँ दिशा में आज भी गुंजायमान हो रही है। आज ही के दिन वर्तमान आचार्य विजयराज म सा का पदवरोहण दिवस भी है, वे संघ नायक होकर हम सबको मार्गदर्शन दे रहे हैं, सरलता, सहजता, विनम्रता और सहृदयता जैसे गुणों के कारण वे जन जन दिलों में समाये हुए हैं। हमें आचार्य नानेश एवं वर्तमान आचार्य विजय गुरुदेव के अंदर रहे हुए गुणों को आत्मसात करने हेतु सजग रहना चाहिए। दिवस को आयम्बील दिवस के रूप में तप त्याग पूर्वक मनाया गया। इससे पूर्व महासती पुण्यप्रिया, महासती सत्यप्रभा एवं महासती शीलप्रभा ने आचार्य नानेश एवं वर्तमान आचार्य विजय गुरुदेव की महानता से सबको रूबरू कराया। धर्म सभा में नारायण खटोड़, विनोद कोठारी, प्रदीप मट्ठा एवं लक्ष्मी पोखरना ने विचार व्यक्त किये। साध्वी रत्ना राजश्री जी म सा ने विभिन्न प्रत्याख्यान कराने के बाद मंगल पाठ सुनाया, संचालन संघ मंत्री इन्द्रेश कोठारी ने किया।