चित्तौड़गढ़। गांधीनगर स्थित नानू नवकार भवन में चातुर्मासिक प्रवचन करते हुए शांतक्रांति संघ की विदुषी महासती शीलप्रभा ने कहा कि ज्ञानियों के अनुसार किसी भी कार्य की सफलता हेतु धैर्य रखना ज़रूरी है। हम आज किसी कार्य को शुरू करके तत्काल ही उसका फल प्राप्त करना चाहें तो ये संभव नहीं है। इसके लिए हमें निरंतर उचित कर्म करते हुए इंतज़ार करना अथवा धैर्य रखना ज़रूरी है तभी हम मंजिल तक पहुँच पाते हैं। जैसे हम इंदौर जाने के लिए टिकिट लेकर रेलगाड़ी में बैठ गए और रेलगाड़ी चल पड़ी परन्तु रेलगाड़ी के चलने मात्र से ही तुरंत हम इंदौर नहीं पहुँच सकते और इसके लिए हमें 6 -7 घंटे इंतज़ार करते हुए धैर्य रखना ज़रूरी है । अतः हमें चाहिए कि हम धैर्य संपन्न बन कर सही दिशा में कर्म करते रहें। कर्म का फल निश्चित मिलेगा, आज नहीं तो कल मिलेगा -प्रभु महावीर ने भी धैर्य धारण करते हुए मोन रह कर साढ़े बारह वर्षों तक ध्यान साधना की तब कहीं जाकर उन्हें केवल ज्ञान प्राप्त करने में सफलता मिली और वे हमारे लिए आराध्य बन गए। इससे पूर्व महासती सत्यप्रभा ने कहा कि जिस तरह हम सांप से डरते हैं उसी तरह पाप से भी डरेंगे तो हम आत्म कल्याण की डगर पर आगे से आगे बढ़ते जायेंगे । नानू नवकार भवन में बालिकाओं हेतु संस्कार शिविर गतिमान है जहां निरंतर जीवन के सम्यक विकास हेतु छोटे छोटे सूत्र के माध्यम से बालिकाओं को सँस्कारित किया जा रहा है। इसी क्रम में शिविरार्थी छात्रा हितिशा एवं धार्मिक जैन ने आज की संस्कार छमूे को धर्म सभा के समक्ष प्रस्तुत किया। सभी ने बालिकाओं का खूब उत्साह वर्धन किया। साध्वी रत्ना राजश्री जी म सा ने विभिन्न प्रत्याख्यान कराने के बाद मंगल पाठ सुनाया। संचालन संघ मंत्री इन्द्रेश कोठारी ने किया।