उज्जैन। दीपावली के बाद शुक्रवार को उज्जैन और राजस्थान के नाथद्वारा में 350 साल पुरानी गौ क्रीड़ा परंपरा निभाई गई। मेवाड़ में इसे खेखरा उत्सव कहते हैं। इसमें मंदिर से श्रीजी की गायों को एक साथ छोड़ा जाता है। ग्वाले बछड़ों को गोद में उठा लेते हैं और गायों को रिझाते हैं।
गायें गलियों से गुजरती हैं और भक्त दोनों तरफ कतार लगाकर उन्हें छूते हैं। मान्यता है कि जो श्रद्धालु गायों को छू लेता है, उसे श्रीकृष्ण का आशीर्वाद मिल जाता है। उत्सव के लिए भक्तों ने दोपहर से गोविंद चौक की गलियों, छतों पर जगह रोक ली थी और ‘बोल गिरिराजधरण’ के जयकारे लगा रहे थे।