मंदसौर। मंदसौर जिला चिकित्सालय में पदस्थ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. ऋतु शर्मा पर इलाज में गंभीर लापरवाही के आरोप लगे हैं। गलत इलाज, समय पर जांच न होना और उचित सलाह नहीं मिलने के कारण गर्भवती महिला पूनम तथा उसके गर्भ में पल रहे दो नवजात शिशुओं की मौत हो गई। महिला की मृत्यु 30 दिसंबर को हुई। इस मामले की शिकायत परिजनों ने मंगलवार को जनसुनवाई में की, जिसके बाद प्रकरण सामने आया।
मृतका के पति ने बताया कि पूनम का इलाज पिछले करीब आठ महीनों से डॉ. ऋतु शर्मा के पास चल रहा था। 16 दिसंबर 2025 को कराई गई सोनोग्राफी में दोनों शिशु जीवित बताए गए थे। इसके पांच दिन बाद पूनम की तबीयत बिगड़ने लगी, लेकिन आरोप है कि बिना समुचित जांच किए केवल छह दिन की दवाएं देकर घर भेज दिया गया।
पति का आरोप है कि 23 दिसंबर को एक निजी अस्पताल में इंजेक्शन और ग्लूकोज चढ़ाया गया, लेकिन रात में पूनम की हालत और अधिक बिगड़ गई। 24 दिसंबर को कराई गई सोनोग्राफी में दोनों शिशुओं की धड़कन नहीं मिलने पर डॉ. शर्मा ने जिला अस्पताल में डिलीवरी कराने की सलाह दी।
जिला अस्पताल में नहीं मिला उपचार-
परिजन जब जिला चिकित्सालय पहुंचे तो वहां यह कहकर इलाज से इनकार कर दिया गया कि महिला का उपचार पहले से डॉ. शर्मा कर रही थीं। परिजनों का आरोप है कि करीब तीन घंटे तक भटकने के बावजूद कोई सहायता नहीं मिली। उन्होंने डिलीवरी वार्ड की डॉक्टर पर प्रताड़ना का आरोप भी लगाया। मजबूरी में परिजनों ने लिखित सहमति देकर उसी दिन महिला को डिस्चार्ज करा लिया।
निजी अस्पतालों में भी बिगड़ती गई स्थिति-
इसके बाद पूनम को शुक्ला कॉलोनी स्थित पाटीदार अस्पताल ले जाया गया, जहां जांच में शरीर में सूजन, लिवर में गड़बड़ी और खून से जुड़ी गंभीर समस्याएं पाई गईं। डॉक्टरों ने डिलीवरी को अत्यंत जोखिम भरा बताया। बेहतर इलाज की उम्मीद में परिजन 24 दिसंबर की रात उदयपुर के जीवन ज्योति हॉस्पिटल पहुंचे, जहां महिला के अंगों की स्थिति अत्यंत नाजुक बताई गई।
ऑपरेशन के बाद महिला की मौत-
25 दिसंबर को महिला का ऑपरेशन किया गया, जिसमें दो मृत नवजात शिशुओं का जन्म हुआ। ऑपरेशन के बाद भी महिला की हालत गंभीर बनी रही। अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद 30 दिसंबर को घर पर महिला ने दम तोड़ दिया। इसके बाद परिजन 6 जनवरी को जनसुनवाई में पहुंचे और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी चिकित्सकों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।