चित्तौड़गढ़/मंदसौर। राजस्थान में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार के खिलाफ सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स (सीबीएन) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए चित्तौड़गढ़ जिले के सुरजना गांव के पास सुनसान इलाके में चल रही एमडी ड्रग फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। नेशनल हाईवे से करीब 7 किलोमीटर अंदर स्थित इस फैक्ट्री से करीब 2 करोड़ रुपए मूल्य की ड्रग, केमिकल और हाई-टेक उपकरण जब्त किए गए हैं। मुख्य सरगना की तलाश जारी है, जो राजस्थान का निवासी बताया जा रहा है और फिलहाल मंदसौर में रह रहा था।

यह कार्रवाई मंगलवार रात करीब 10 बजे की गई थी। फैक्ट्री पिछले छह महीनों से संचालित हो रही थी। मुख्य तस्कर मध्यप्रदेश में रहकर फैक्ट्री को ऑपरेट कर रहा था, जो फिलहाल फरार है।

15 लाख में खरीदा मकान, इंदौर से आता था कच्चा माल-
जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी ने करीब छह माह पहले 15 लाख रुपए में मकान खरीदकर वहां ड्रग फैक्ट्री स्थापित की थी। एमडी ड्रग निर्माण में प्रयुक्त कच्चा माल और केमिकल इंदौर (मध्यप्रदेश) से मंगवाए जाते थे। फैक्ट्री की निगरानी और ड्रग निर्माण के लिए एक व्यक्ति को मौके पर तैनात किया गया था, जिसे छापेमारी के दौरान मौके से गिरफ्तार कर लिया गया। वहीं मकान मालिक को भी हिरासत में लेकर गिरफ्तार किया गया है।

5.894 किलो ड्रग जब्त, हाई-टेक लैब मिली
जिला अफीम अधिकारी राजेश कुमार मीणा ने बताया कि तलाशी के दौरान कुल 5.894 किलोग्राम मादक पदार्थ बरामद किए गए हैं, जिनमें 107 ग्राम एमडी पाउडर, 3.961 किलोग्राम एमडी क्रूड, 1.826 किलोग्राम अल्प्राजोलम। इसके अलावा करीब 200 किलोग्राम प्रिकर्सर केमिकल, ड्रग निर्माण में उपयोग होने वाले बर्तन, हाई-टेक लैब उपकरण और तस्करी में प्रयुक्त एक बाइक भी जब्त की गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत लगभग 2 करोड़ रुपए आंकी गई है।

पहले भी बन चुकी थी ड्रग-
अधिकारियों के अनुसार मौके पर मिले उपकरण और बर्तन इस बात की पुष्टि करते हैं कि यह फैक्ट्री पहली बार इस्तेमाल नहीं हुई थी। यहां पहले भी कई बार ड्रग तैयार की जा चुकी थी, जिसकी सप्लाई स्थानीय स्तर के साथ अन्य जिलों व राज्यों में की जाती रही होगी।

गार्ड और मकान मालिक गिरफ्तार-
छापेमारी के दौरान सोनू सिंह उर्फ अकबर को मौके से हिरासत में लिया गया, जिसे बाद में गिरफ्तार कर लिया गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि वह लैब पर गार्ड और हेल्पर की भूमिका निभा रहा था। इसके बाद सीबीएन ने सुरजना गांव निवासी मांगीलाल धाकड़ को भी गिरफ्तार किया, जिसके बाड़े में यह अवैध फैक्ट्री संचालित हो रही थी। पूछताछ में उसने मुख्य आरोपी को 15 लाख रुपए में जगह बेचने की बात स्वीकार की, लेकिन कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका।

एनडीपीएस एक्ट में केस, नेटवर्क की जांच जारी-
दोनों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम 1985 के तहत मामला दर्ज किया गया है। सीबीएन अब कच्चे माल की सप्लाई, वित्तीय लेन-देन और पूरे नेटवर्क की गहन जांच कर रही है। मुख्य सरगना की तलाश जारी है, जो राजस्थान का निवासी बताया जा रहा है और फिलहाल मंदसौर में रह रहा था।

लापरवाही पर पुलिसकर्मी सस्पेंड-
मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक मनीष त्रिपाठी ने किला चौकी प्रभारी एएसआई हिम्मत सिंह और कॉन्स्टेबल रणजीत पूरी को निलंबित कर दिया है। एसपी ने बताया कि यह कार्रवाई सूचना तंत्र कमजोर रहने के कारण की गई है।

आधार कार्ड को लेकर फैली अफवाहों पर सफाई-
जिला अफीम अधिकारी राजेश कुमार मीणा ने बताया कि आरोपी सोनू सिंह के आधार कार्ड को लेकर फैलाई जा रही अफवाहें निराधार हैं। वह जन्म से मुस्लिम परिवार से है, माता-पिता की मृत्यु के बाद एक हिंदू परिवार ने उसे गोद लिया था। उसका आधार कार्ड पूरी तरह वैध है।

एमडी ड्रग का नया कॉरिडोर बनता बॉर्डर इलाका-
पिछले 15 महीनों में मध्यप्रदेश-राजस्थान बॉर्डर क्षेत्र में 7 ड्रग फैक्ट्रियां पकड़ी जा चुकी हैं, जिनसे करीब 1982 करोड़ रुपए की ड्रग्स जब्त की गई है। विशेषज्ञों के अनुसार इंदौर, भोपाल, जयपुर और उदयपुर जैसे बड़े शहरों की नजदीकी के कारण यह क्षेत्र ड्रग तस्करों का नया कॉरिडोर बनता जा रहा है।
