मंदसौर। जिला अस्पताल का ब्लड बैंक, जहां हर दिन मरीजों की जिंदगी बचाने के लिए रक्त उपलब्ध कराया जाता है, वहीं अब करोड़ों की हेराफेरी के आरोपों से घिर गया है। खुलासा हुआ है कि 35 डॉक्टरों और 26 कर्मचारियों ने प्रोत्साहन के नाम पर 43 लाख 91 हजार रुपये आपस में बांट लिए।
निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को जिला अस्पताल द्वारा रक्त उपलब्ध कराने पर 1050 रुपये की राशि के साथ ब्लड भी डोनेट कर देना पड़ता हे। ये पूरी राशि रोगी कल्याण समिति में जमा होना चाहिए। लेकिन यहां 750 रुपये जमा कर 300 रुपये प्रति यूनिट “प्रोत्साहन” के नाम पर बांटे जाते रहे। सवाल यह है कि क्या सरकारी अस्पतालों में वेतन लेने वाले कर्मचारियों को इस तरह की अतिरिक्त राशि लेने का कोई वैधानिक अधिकार है?
यह सिलसिला एक-दो महीने नहीं, बल्कि अप्रैल 2016 से जनवरी 2025 तक लगातार चलता रहा। इस दौरान 14 हजार 639 यूनिट रक्त के बदले 1 करोड़ 53 लाख रुपये से अधिक की राशि प्राप्त हुई, जिनमें से करीब 44 लाख रुपये बंटवारे में चले गए
जब जिम्मेदार अधिकारी से बात की गई तो उनके अनुसार उस समय के स्वस्थ अधिकारी ओर कलेक्टर की अनुशंसा पर ही प्रोत्साहन राशि का बंटवारा किया गया ओर अगर कोई हमें आवेदन आता हे तो जांच की जायेगी।
जब ऐसा कोई नियम स्वास्थ विभाग में हे नहीं तो आखिर इतने सालों से ये प्रोत्साहन राशि की बंदरबाट क्यों चलती रही।इतने समय तक आखिर जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारियों से भागते रहे।