चित्तौड़गढ़/कानोड़। श्रीमाली ब्राह्मण समाज तड़बारा मेवाड़ संस्थान, चित्तौड़गढ़ द्वारा नानेश सभागार, नई बावड़ी (कानोड़) में आयोजित प्रथम प्रतिभा एवं भामाशाह सम्मान समारोह-2026, प्रथम परिवार परिचय ग्रंथ विमोचन समारोह एवं प्रतिनिधि सभा मेवाड़ संस्थान, उदयपुर सामाजिक समरसता, शिक्षा और संस्कारों का प्रेरणादायी संगम बन गया। समारोह में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से आए सैकड़ों समाजबंधुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां महालक्ष्मी के पूजन, दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ हुआ। समारोह की अध्यक्षता तड़बारा संस्थान के अध्यक्ष मदनलाल व्यास ने की। मुख्य अतिथि मेवाड़ संस्थान, उदयपुर के अध्यक्ष दिग्विजय श्रीमाली रहे। परिवार परिचय ग्रंथ का विमोचन श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर स्वामी हितेश्वरानंद सरस्वती महाराज के करकमलों से हुआ।
समारोह में अति विशिष्ट अतिथि के रूप में जिला एवं सत्र न्यायाधीश महेंद्र कुमार दवे, विशिष्ट अतिथि के रूप में बार काउंसिल ऑफ इंडिया के को-चेयरमैन सुरेशचंद्र श्रीमाली, अखिल भारतीय श्रीमाली समाज संस्था के पूर्व उपाध्यक्ष भूपेंद्र कुमार श्रीमाली, विकास अधिकारी वीरेंद्र कुमार व्यास, संयोजक भगवतीलाल श्रीमाली एवं अरविंद श्रीमाली सहित संस्थान के पदाधिकारी एवं अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।
समारोह में शिक्षा, खेल, सांस्कृतिक एवं अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली समाज की 35 प्रतिभाओं का सम्मान किया गया। वहीं वर्ष 2017 में कानोड़ में आयोजित प्रथम यज्ञोपवीत संस्कार कार्यक्रम के सहयोगी रहे 170 भामाशाहों को समाज के प्रति उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर समाज के इतिहास, वंशावली एवं पारिवारिक विवरणों को समाहित करने वाले प्रथम परिवार परिचय ग्रंथ का संत-महात्माओं एवं अतिथियों के करकमलों से विधिवत विमोचन किया गया।
अपने प्रेरक उद्बोधन में श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर स्वामी हितेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि परिवार परिचय ग्रंथ केवल नामों का संकलन नहीं, बल्कि समाज की संस्कृति, परंपरा, संस्कार और पीढ़ियों को जोड़ने वाला एक जीवंत दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि जिस समाज में अपनी जड़ों, परिवारों और संस्कारों का संरक्षण होता है, वही समाज निरंतर प्रगति करता है। प्रतिभाओं एवं समाजहित में योगदान देने वाले भामाशाहों का सम्मान नई पीढ़ी को उत्कृष्ट कार्य करने की प्रेरणा देता है तथा सेवा और संस्कार की परंपरा को सुदृढ़ करता है।
महामंत्री उदयलाल श्रीमाली ने अतिथियों का परिचय एवं स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत किया। परिवार परिचय ग्रंथ के प्रधान संपादक प्रद्युम्न कुमार श्रीमाली ने ग्रंथ की विशेषताओं एवं उसके उद्देश्य की जानकारी दी।
मेवाड़ संस्थान के अध्यक्ष दिग्विजय श्रीमाली, तड़बारा संस्थान के अध्यक्ष मदनलाल श्रीमाली, जिला एवं सत्र न्यायाधीश महेंद्र कुमार दवे, भूपेंद्र कुमार श्रीमाली सहित अन्य वक्ताओं ने समाज में शिक्षा, संगठन, सामाजिक समरसता एवं युवाओं की सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज को नई दिशा, ऊर्जा एवं सकारात्मक प्रेरणा प्रदान करते हैं।
समारोह के दौरान मेवाड़ संस्थान की प्रतिनिधि सभा भी आयोजित की गई, जिसमें संगठन की गतिविधियों, आगामी योजनाओं एवं समाजहित से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
कार्यक्रम में वृक्ष मित्र जाह्नवी त्रिवेदी (नई बावड़ी, कानोड़) ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए उपस्थित 500 से अधिक समाजजनों को एक-एक पौधा भेंट किया तथा उसे अपने गांव में रोपित कर उसकी नियमित देखभाल करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. नर्बदा शंकर श्रीमाली, प्रद्युम्न कुमार श्रीमाली एवं अभिषेक श्रीमाली ने किया। अंत में संस्थान के सहमंत्री अभिषेक श्रीमाली ने संत-महात्माओं, अतिथियों, भामाशाहों, प्रतिभाओं, कार्यकारिणी सदस्यों, स्वयंसेवकों एवं समाजबंधुओं का आभार व्यक्त करते हुए आयोजन को सफल बनाने में मिले सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।