नीमच। धर्मनगरी नीमच रविवार को भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर हो उठी, जब पूज्य साध्वी अमिपूर्णाश्रीजी महारासा के सानिध्य में ज्ञानोत्सव चातुर्मास का मंगल प्रवेश अत्यंत भव्य, गरिमामय और धर्ममय वातावरण में संपन्न हुआ। नगर की लाडली साध्वी द्वय पूज्य मृदपूर्णाश्रीजी महारासा एवं पूज्य जिनांगपूर्णाश्रीजी महारासा सहित कुल 10 साध्वियों के ठाणे के नीमच आगमन पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा, मंगलगान और जयघोष के साथ भावभीना स्वागत किया। साध्वी वृंद के दर्शन मात्र से श्रद्धालुओं की आंखें श्रद्धा से नम हो उठीं और पूरा नगर धर्ममय वातावरण में रंग गया।
प्रातः जैन भवन से प्रारंभ हुई मंगल प्रवेश शोभायात्रा वीर पार्क रोड, महेश सर्कल, कमल चौक, घंटाघर एवं पुस्तक बाजार सहित नगर के प्रमुख मार्गों से निकली। मार्गभर श्रद्धालुओं ने साध्वी वृंद के दर्शन कर वंदन किया तथा णमो अरिहंताणं के पावन जयघोष से वातावरण गुंजायमान हो उठा। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर साध्वीश्री के मंगल प्रवेश का अभिनंदन किया। शोभायात्रा में समाज के वरिष्ठजन, महिलाएं, युवा एवं बच्चों की उत्साहपूर्ण सहभागिता देखने को मिली।
शोभायात्रा के उपरांत जैन भवन में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए पूज्य साध्वी अमिपूर्णाश्रीजी महारासा ने कहा कि चातुर्मास आत्मशुद्धि, तप, त्याग, स्वाध्याय और आत्मकल्याण का अनुपम पर्व है। यह समय आत्ममंथन कर जीवन को धर्ममय बनाने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने धर्म को केवल पूजा-पाठ तक सीमित न रखते हुए उसे जीवन का आचरण बनाने, अहिंसा, क्षमा, करुणा एवं संयम जैसे श्रेष्ठ मानवीय मूल्यों को आत्मसात करने तथा आत्मचिंतन के माध्यम से जीवन को सार्थक बनाने का प्रेरणादायी संदेश दिया।