प्रतापगढ़। बेटियों के विवाह को सम्मानजनक और सरल बनाने के उद्देश्य से संजीवनी सेवा संस्थान प्रतापगढ़ एवं न्यू जागृति सेवा संस्थान जयपुर द्वारा पिछले कई वर्षों से ‘कन्यादान महादान योजना’ संचालित की जा रही है। इस योजना के तहत सर्व समाज की बालिग बेटियों का विवाह उनके लगन मुहूर्त के अनुसार उनके घर पर ही कराया जाता है।
संस्थान द्वारा विवाह में आवश्यक सामग्री जैसे बक्से वाला बेड, गद्दा, तकिया, आलमारी, ड्रेसिंग शीशा, दुल्हन की ड्रेस, सोफा सेट, बर्तन, टीवी, घड़ियाँ, तोरण, उपहार सामग्री आदि कम लागत पर उपलब्ध कराई जाती है। साथ ही लगभग 400 लोगों के लिए सूखे भोजन की सामग्री भी प्रदान की जाती है।
संस्थान से जुड़ने के फायदे
संस्थान के माध्यम से विवाह करने पर लाभार्थियों को सरकारी योजनाओं का लाभ भी मिलता है। संस्था द्वारा ली गई राशि तीन किश्तों में वापस कर दी जाती है, बशर्ते समय पर विवाह पंजीयन करवाकर कार्यालय में जमा कराया जाए। इससे बाल विवाह पर भी रोक लगती है और प्रशासनिक जागरूकता अभियान को बल मिलता है।
पंजीयन प्रक्रिया
इच्छुक परिवार एरिया पति रोड, गली नंबर 3, प्रतापगढ़ स्थित संजीवनी सेवा संस्थान कार्यालय में आकर विवाह में दिए जाने वाले सामान को देख सकते हैं, योजना की जानकारी ले सकते हैं और नाममात्र पंजीयन शुल्क के साथ पंजीयन करवा सकते हैं।
योजना का लाभ कैसे मिलेगा-
- दूल्हा-दुल्हन बालिग हों।
- घरवालों की सहमति से लगन मुहूर्त के अनुसार घर पर विवाह हो।
- विवाह पंजीयन एक सप्ताह के भीतर कार्यालय में जमा कराया जाए।
संस्थान के वरिष्ठ सलाहकार बलराम शर्मा (सेवानिवृत्त सहायक अधिशाषी अधिकारी, चित्तौड़गढ़ सहकारी बैंक) ने बताया कि संस्थान का अधिकृत कार्यालय केवल एरिया पति रोड, गली नंबर 3, प्रतापगढ़ में ही है।
उन्होंने आमजन से अपील की कि किसी भी व्यक्ति को अग्रिम राशि न दें और केवल कार्यालय से प्राप्त आधिकारिक रसीद पर ही पंजीयन करें। उन्होंने कहा कि कुछ लोग संस्था का नाम लेकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं, ऐसे लोगों से सावधान रहें।
संस्थान का उद्देश्य-
संस्थान के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामदयाल बोरदिया ने बताया कि बढ़ती महंगाई के दौर में गरीब परिवार अपनी बेटियों की शादी में भारी कर्ज़ में डूब जाते हैं। इस स्थिति से राहत दिलाने के लिए संस्था ने यह योजना शुरू की है, ताकि बेटियों का विवाह सम्मानपूर्वक और कम खर्च में संपन्न हो सके।
संस्थान द्वारा दुल्हनों को भूखंड भी-
संस्थान का लक्ष्य “हर महिला का घर हो अपना” है। इसके तहत संस्था कई जिलों में दुल्हनों को भूखंड आवंटित कर चुकी है। यदि विवाह उपरांत ससुराल पक्ष में दुल्हन के साथ सद्व्यवहार होता है, तो संस्था द्वारा जांच के बाद भूखंड उपलब्ध कराया जाता है।
संस्थान ने आमजन से अपील की है कि योजना का लाभ लेने से पहले संस्थान कार्यालय में आकर संपूर्ण जानकारी प्राप्त करें और केवल अधिकृत कार्यालय से ही पंजीयन कराएं।