मनासा (देवरी खवासा)। दीपावली से एक दिन पूर्व गुर्जर समाज ने अपनी वर्षों पुरानी प्राचीन परंपरा का पालन करते हुए गांव के बाहर स्थित एक कुएं पर सामूहिक रूप से बेलवाड़ी लगाकर पूर्वजों का श्राद्ध, हवन एवं ध्यान किया। यह परंपरा समाज में पीढ़ियों से चली आ रही है और पूर्वजों की स्मृति एवं आशीर्वाद का प्रतीक मानी जाती है।
समाज के सभी परिवार इस दिन विशेष भोजन बनाकर लाते हैं, जिसे युवा और बुजुर्ग एक साथ बैठकर श्रद्धा एवं एकता के भाव से ग्रहण करते हैं। श्राद्ध और हवन के उपरांत ग्रामीण गाय-बैलों को मेहंदी लगाते हैं, जिसे शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
समाजजनों का कहना है कि यह परंपरा पूर्वजों के आशीर्वाद, एकता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है, जिसे हर वर्ष दीपावली से पूर्व पूरे समाज द्वारा श्रद्धा और आस्था के साथ निभाया जाता है।
इस अवसर पर गांव के पटेल मदनलाल गुर्जर, मानसिंह गुर्जर, अंबाराम गुर्जर, प्रभुलाल गुर्जर आदि ने बताया कि यह परंपरा हमारे पूर्वजों के समय से चली आ रही है और समाज इसे आगे भी बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
गांव में श्रद्धा, आस्था और एकता के साथ सम्पन्न हुआ यह वार्षिक आयोजन गुर्जर समाज की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का जीवंत उदाहरण बना।