गलियाकोट। विश्वप्रसिद्ध दाऊदी बोहरा समुदाय की दरगाह सैयदी काकाजी मुल्ला ईसा भाई साहब का सालाना 243वां उर्स बड़ी अकीदत और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर चार दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें कुरान ख्वानी और दरीस की मजलिस शामिल रही।
उर्स की बेहरम रात में बोहरा समाज के 53वें धर्मगुरु सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन साहब के परिवार के हमजा भाई साहब गलियाकोट से विशेष रूप से तशरीफ लाए। उनकी सदारत में फातिहा और कुरान ख्वानी आयोजित की गई। इस दौरान दरगाह पर गिलाफ और फूलों की चादर चढ़ाई गई तथा देश और दुनिया में अमन-चौन, सुख-समृद्धि और भाईचारे की दुआ मांगी गई।
हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रतीक इस उर्स में देश-विदेश से हजारों जायरीन पहुंचे, जिनमें दुबई, बहरीन, कुवैत, मुंबई, पुणे, सूरत, इंदौर, उदयपुर, रतलाम, उज्जैन, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, मंदसौर और नीमच से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
यह माना जाता है कि दरगाह पर आने वाला हर जायरी अपनी मुराद लेकर आता है और यहां से खुश होकर लौटता है। उर्स के दौरान जायरीनों के लिए दूध-शरबत की सबीले लगाई गईं और प्रतिदिन लंगर तकसीम किया गया।