चित्तौड़गढ़। रामस्नेही सम्प्रदाय के युवा संत भागवताचार्य संत दिग्विजयराम महाराज ने कहा कि कलयुग में कथाओं के माध्यम से जीवन जीने की कला सीखने के साथ-साथ माता-पिता एवं गुरुओं का सम्मान करना भी आवश्यक है।
वे निंबाहेड़ा स्थित सोनी परिवार द्वारा कृषि उपज मंडी प्रांगण में आयोजित सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के तृतीय दिवस पर व्यासपीठ से प्रवचन कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि माता-पिता के उपकारों को कभी नहीं भूलना चाहिए तथा वृद्धावस्था में उनकी सेवा एवं देखभाल करनी चाहिए, जिससे वृद्धाश्रम जैसी परिस्थितियां उत्पन्न न हों। इस दौरान उन्होंने “माँ-बाप को मत भूलना” भजन की प्रस्तुति दी, जिससे श्रद्धालु भावुक हो उठे।
संत श्री ने ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि भक्त ध्रुव ने महर्षि नारद के आशीर्वाद से भगवान नारायण की प्राप्ति की और कठोर तपस्या से ध्रुवलोक प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि भक्ति, संस्कार और ज्ञान से व्यक्ति अटल स्थान प्राप्त कर सकता है।
उन्होंने राजा उत्तानपात, राजा पृथु, जड़ भरत, अजामिल एवं प्रह्लाद चरित्र सहित अनेक प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने हिरण्यकश्यप एवं भक्त प्रह्लाद की कथा सुनाते हुए कहा कि भगवान अपने भक्त की रक्षा अवश्य करते हैं, जो नृसिंह अवतार के रूप में प्रमाणित होता है।
कथा के दौरान नृसिंह अवतार की जीवंत झांकी ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। तृतीय दिवस की कथा के समापन पर सोनी परिवार सहित श्रद्धालुओं ने ठाकुर श्री कल्लाजी एवं व्यासपीठ की महाआरती की। शनिवार को कथा में वामन अवतार एवं श्रीराम-कृष्ण जन्मोत्सव का भव्य आयोजन किया जाएगा।