BREAKING NEWS
KHABAR : कंधों पर 11 किलो की भोलेनाथ प्रतिमा लेकर.. <<     BIG NEWS : नशे का काला साम्राज्य बेनकाब, एमडी.. <<     KHABAR : अफीम किसानों ने मांगों को लेकर मंदसौर.. <<     KHABAR : कनघटी में 25-26 जुलाई को गूंजेगा क्रिकेट का.. <<     KHABAR : नशे से दूरी है जरूरी 2.0 अभियान के तहत.. <<     KHABAR : राहुल गांधी की गिरफ्तारी के विरोध में.. <<     KHABAR : दो सप्ताह बाद खरगोन में झूमकर बरसे बादल,.. <<     शिवपुरी में छात्रों का हल्लाबोल, परीक्षा.. <<     मंदसौर में एनएसयूआई का विरोध प्रदर्शन, पुतला.. <<     शाजापुर में मनाया गया भीम आर्मी का 11वां.. <<     मंदसौर में सांडों की लड़ाई में हादसा टला,.. <<     KHABAR : नवीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी.. <<     KHABAR : 96वें श्रीहनुमान चालीसा पाठ से गूंजा.. <<     VIDEO NEWS: छतरपुर में ग्रामीणों का.. <<     KHABAR : खेल मैदान या निर्माण स्थल? नीमच में शुरू.. <<     VIDEO NEWS: राहुल-प्रियंका की गिरफ्तारी के विरोध.. <<     आदिवासी पारधी समाज की प्रेरणास्रोत शेवराबाई.. <<     VIDEO NEWS: आय से अधिक संपत्ति मामले में लोकायुक्त.. <<    
वॉइस ऑफ़ एमपी न्यूज़ चैनल में विज्ञापन के लिए..
June 1, 2026, 11:59 am
KHABAR : अर्हम ध्यान एवं योग शिविर में सैकड़ों साधकों ने लिया स्वस्थ जीवन का संकल्प, मुनिश्री प्रणम्य सागर ने कहा- अर्हम मंत्र और ध्यान से चिंता, तनाव व अवसाद से मिलता है मुक्ति का मार्ग, पढ़े शब्बीर बोहरा की खबर 

Share On:-

मनासा। वर्तमान समय की भागदौड़ भरी जीवनशैली में शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक शांति और आध्यात्मिक विकास की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। ऐसे समय में ष्अर्हमष् ध्यान एवं योग व्यक्ति को तनावमुक्त, स्वस्थ और सकारात्मक जीवन जीने की प्रेरणा देता है। यह विचार अर्हम योग के प्रणेता मुनिश्री 108 प्रणम्य सागर जी महाराज ने व्यक्त किए।

वर्धमान धर्मशाला में आयोजित अर्हम ध्यान एवं योग शिविर में सैकड़ों साधक-साधिकाओं को संबोधित करते हुए मुनिश्री ने कहा कि अर्हम ध्यान और योग के नियमित अभ्यास से व्यक्ति चिंता, तनाव, अवसाद तथा मानसिक अस्थिरता जैसी समस्याओं से बच सकता है। उन्होंने बताया कि अर्हम योग के पांच प्रमुख चरण होते हैं, जिन्हें पंच मुद्राएं कहा जाता है। इनमें सक्रियण, पंच नमस्कार मुद्राओं का अभ्यास एवं श्वास नियंत्रण प्रमुख हैं, जो शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक संतुलन स्थापित करने में सहायक सिद्ध होते हैं।

मुनिश्री ने कहा कि अर्हम जैन धर्म का अत्यंत शक्तिशाली बीज मंत्र है। इसके सचेतन जाप और ध्यान से मन को शांति, एकाग्रता और आंतरिक ऊर्जा प्राप्त होती है। यह साधना व्यक्ति के भीतर सकारात्मकता का संचार कर जीवन को नई दिशा प्रदान करती है।

इस अवसर पर अर्हम ध्यान एवं योग से दीक्षित साक्षी दीदी ने उपस्थित साधकों को विभिन्न योगिक क्रियाओं, आसनों और प्राणायाम का अभ्यास कराया। उन्होंने योग के माध्यम से शरीर को स्वस्थ एवं मन को संतुलित रखने के उपाय भी बताए।

योगाभ्यास के पश्चात मुनिश्री प्रणम्य सागर जी महाराज ने साधकों की विभिन्न जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए ध्यान, योग और आध्यात्मिक साधना के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।

एक दिवसीय शिविर में जैन सोशल ग्रुप, योग मित्र मंडल, माहेश्वरी समाज, पंजाबी समाज तथा सकल जैन समाज सहित विभिन्न संगठनों के बड़ी संख्या में योग प्रेमी एवं साधक-साधिकाएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में जैन सोशल ग्रुप के अध्यक्ष मनोज गांधी ने सभी अतिथियों एवं सहभागियों का आभार व्यक्त किया।

शिविर के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली, मानसिक शांति और आध्यात्मिक जागरण का संदेश समाज तक पहुंचाया गया।

VOICE OF MP
एडिटर की चुनी हुई ख़बरें आपके लिए
SUBSCRIBE