चित्तौड़गढ़। निकुंभ थाना पुलिस ने अंतरराज्यीय संगठित भैंस चोरी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए गिरोह के सरगना सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात में करीब 120 भैंसें चोरी करने की 40 वारदातों का खुलासा किया है। चोरी की भैंसों की अनुमानित कीमत करीब 2 करोड़ रुपये बताई गई है। पुलिस ने वारदात में प्रयुक्त पिकअप वाहन और मोटरसाइकिलें भी बरामद की हैं। गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।
जिला पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह यादव के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गजेंद्र सिंह जोधा एवं वृत्ताधिकारी बड़ीसादड़ी हरीश चंद्र सिंह चूंडावत के सुपरविजन में निकुंभ थानाधिकारी प्रभुसिंह चूंडावत के नेतृत्व में टीम ने कार्रवाई की।
30 दिन की लगातार निगरानी के बाद दबोचा गिरोह-
पुलिस के अनुसार, 28 जुलाई को निकुंभ थाना क्षेत्र के गरदाना गांव से पांच भैंस चोरी होने की घटना के बाद पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू की। जांच के दौरान पुलिस टीम ने घटनास्थल से लेकर मध्यप्रदेश के मंदसौर, मुल्तानपुर और बोतलगंज तक आरोपियों के आने-जाने के रास्तों और संभावित ठिकानों की जानकारी जुटाई। तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर तंत्र के आधार पर पुलिस ने गिरोह की पहचान की।
पुलिस को जानकारी मिली कि गिरोह के सदस्य पहले मोटरसाइकिल से क्षेत्र की रेकी करते थे। इसके बाद सुनसान पशु बाड़ों को निशाना बनाकर भैंसों को चोरी करते और पिकअप वाहन में भरकर मध्यप्रदेश ले जाते थे।
मंदसौर के पशु हाट में बेचते थे चोरी की भैंसें-
पूछताछ में सामने आया कि गिरोह पिछले करीब दो वर्षों से संगठित तरीके से पशु चोरी की वारदातें कर रहा था। चोरी की भैंसों को मंदसौर जिले के घूंदड़का गांव में प्रत्येक रविवार लगने वाले पशु हाट में बेच दिया जाता था। बिक्री से प्राप्त राशि को गिरोह के सदस्य आपस में बांट लेते थे।
गिरोह राजस्थान के चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, उदयपुर, प्रतापगढ़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, जालौर और पाली सहित मध्यप्रदेश के मंदसौर, नीमच, रतलाम, उज्जैन, जावरा, जावद, नागदा, रामपुरा, मनासा, सीतामऊ, भानपुरा, आलोट और आसपास के क्षेत्रों में वारदात करना कबूल किया है। इसके अलावा गुजरात के अहमदाबाद, गांधीनगर और मेहसाणा क्षेत्रों में भी पशु चोरी की वारदातों की जानकारी सामने आई है।
रात में करते थे वारदात, टोल पर छिपाते थे पहचान-
पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य रात करीब 9 से 10 बजे के बीच वारदात को अंजाम देते थे। दो सदस्य मोटरसाइकिल से पहले क्षेत्र की रेकी कर पिकअप वाहन में सवार साथियों को लोकेशन भेजते थे। इसके बाद पिकअप वाहन मौके पर पहुंचता और भैंसों को उसमें भरकर ले जाया जाता था।
गिरोह पिकअप वाहन को बिना नंबर के रखता था। टोल नाकों पर नकद भुगतान कर चालक चेहरा ढककर पहचान छिपाने का प्रयास करता था। पुलिस द्वारा रास्ते में रोके जाने पर आरोपी भैंसों को खरीदा हुआ बताकर बचने का प्रयास करते थे।
पुलिस टीम को भी झेलनी पड़ी दुर्घटना-
गिरोह की तलाश के दौरान निकुंभ पुलिस टीम को भी मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। 31 जुलाई को आरोपियों के संभावित ठिकानों पर दबिश के बाद लौटते समय निम्बाहेड़ा-मंगलवाड़ रोड पर धीनवा के पास पुलिस टीम के निजी वाहन की ट्रेलर से दुर्घटना हो गई थी। हादसे में टीम के सदस्यों को गंभीर चोटें आई थीं और उनका निम्बाहेड़ा, चित्तौड़गढ़ तथा उदयपुर में उपचार कराया गया। इसके बावजूद पुलिस टीम ने जांच जारी रखते हुए आरोपियों की गतिविधियों पर निगरानी रखी। बाद में मंदसौर से निम्बाहेड़ा की ओर आते समय मालनखेड़ी के पास जाल बिछाकर चार आरोपियों को पकड़ा गया।
चार आरोपी गिरफ्तार-
पुलिस ने आरिफ पिता फैजल कालिया मुल्तानी (25), सरफराज पिता शेकू दतिया मुल्तानी (25), शहजाद पिता कदीर दतिया मुल्तानी (33) और आसिफ पिता शाबीर दतिया मुल्तानी (25), सभी निवासी मुल्तानपुरा, थाना वाईडी नगर, मंदसौर (मध्यप्रदेश), को गिरफ्तार किया है। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है। साथ ही उनके द्वारा चोरी की गई भैंसों की बरामदगी और गिरोह से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश के प्रयास जारी हैं।
इनकी रही महत्वपूर्ण भूमिका-
कार्रवाई में निकुंभ थानाधिकारी उपनिरीक्षक प्रभुसिंह चूंडावत, सहायक उपनिरीक्षक बंशीलाल, हेड कांस्टेबल उगमाराम, कांस्टेबल कमलेश, संपत, सूर्यपाल सिंह और थानसिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही।