नीमच। शहर की सबसे जटिल समस्या बंगला-बगीचा आज भी शत-प्रतिशत समाधान का इंतजार कर रही है। वर्ष 2017 में प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान ने उक्त समस्या का अधूरा समाधान किया था। इस अधूरे समाधान के बाद ये समस्या और उलझ गई। रहवासी लगातार सीएम शिवराज के द्वारा पारित किए मसौदे के नियमों में संशोधन करने की मांग कर रहे हैं। नगर पालिका चुनाव से पूर्व दोनों ही पार्टियों के नेताओं ने बंगला बगीचा संघर्ष समिति से वादा किया था कि सरकार में आते ही इस दिशा में उचित कदम उठाएंगे। इसके बाद नपा में भाजपा का बोर्ड बना। नपाध्यक्ष स्वाति चौपड़ा सहित साथी पार्षदों ने जनता की सेवा का संकल्प लिया। बोर्ड के गठन के बाद नपा की कई सम्मेलन भी हुए। लेकिन बंगला-बगीचा का मुद्दा उक्त सम्मेलनों से गायब रहा।
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बंगला बगीचा संघर्ष समिति के आशीष अग्रवाल ने बताया कि अब नगर पालिका अध्यक्ष ने सुझाव मांगे हैं। बंगला बगीचा संघर्ष समिति ने बंगला वासियों के हित में कई सुझाव तैयार किए हैं। इन सभी सुझावों से संबंधित एक पत्र आज गुरूवार दोपहर 1 बजे नगर पालिका कार्यालय पहुंचकर नपाध्यक्ष स्वाति गौरव चौपड़ा को सौंपेंगे। मुझे आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि शासन व नगरपालिका हमारे द्वारा प्रस्तुत सुझावों पर अमल कर नियमों में संशोधन करेगी और सालों से चली आ रही इस जटिल समस्या से हम सभी को निजात दिलाकर फ्रीहोल्ड पट्टा प्रदान करेगी।
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यह सुझाव किए तैयार-
1. बंगला बगीचा क्षेत्र की भूमियों में भूमि पर परिवार के मध्य हुए भूमि के विभाजन, वसीयतनामा, हिबानामा आदि को पंजीकृत हुए बिना भी आवेदनों को स्वीकार किया जाना चाहिए।
माननीय हाईकोर्ट व माननीय सुप्रीम कोर्ट ने कई ऐसे निर्णय में माना गया है कि मौखिक पारिवारिक बटवारा जिसकी बाद में यादी लिखित में बनाई गई हो ऐसे लेख कानूनन वैध दस्तावेज है।
व्यवस्थापन नियम 2017 के नियम 12 के अनुसार भूमि का उपयोग तभी मान्य होगा यदि उसे वैधानिक सिद्ध कर दिया जाए । उपरोक्त दस्तावेज वैधानिक है।
2- सभी बंगला बगीचा रहवासियों व भूमि धारकों ने जमीन तत् समय की बाजार मूल्य देकर व पंजीकृत करा कर खरीदी थी उसकी गाइडलाइन आज कई गुना हो गई है उस गाइडलाइन का 3 प्रतिशत या 8 प्रतिशत प्रीमियम व उसके ऊपर लागू विकास शुल्क व लीज रेंट बहुत अधिक होता है ऐसा प्रतीत होता है कि यह भूमि हमारे द्वारा तत् समय की गाइड लाइन से कई गुना कीमत मे पुन क्रय की जा रही है जो कि उचित नहीं है
अतः सुझाव है कि इसे भूमि क्रय किए गए वर्ष के बाजार मूल्य के 0.5 प्रतिशत आधे या 1 प्रतिशत प्रीमियम पर फ्री होल्ड भूमि प्रदाय की जाये व इस के अतिरिक्त अन्य कोई शुल्क शास्ती आदि ना लिया जावे।
3. व्यवस्थापन बोर्ड पूर्व में हुई रजिस्ट्री दिनांक से भूमि का संपत्ति कर मांगा जा रहा है, जब शासन आज की गाइड लाइन से प्रीमियम वसूल कर नया लीज पट्टा प्रदान कर रहा है तो पूर्व दिनांक से संपत्ति शुल्क मांगे जाने का क्या औचित्य है। अतः सुझाव है कि शासन को संपत्ति शुल्क नया पट्टा प्रदान किए जाने के बाद से लिया जाना चाहिए
4. व्यवस्थापन बोर्ड द्वारा आवेदन के साथ लिंक रजिस्ट्री या मांगी जा रही है जिसका व्यवस्थापन नियम 2017 में कहीं भी उल्लेख नहीं है ना ही भूमि धारकों के पास इतनी पुरानी लिंक रजिस्ट्री उपलब्ध है। अतः लिंक रजिस्ट्री लिए जाना अनुचित है।
5. व्यवस्थापन नियम 2017 में अत्याधिक जटिलता होने से बहुत से भूमि धारक चाह कर भी व्यवस्थापन बोर्ड में आवेदन नहीं लगा पा रहे हैं। ’अतः उक्त नियम में संशोधन होने के बाद देरी से प्रेषित हुए आवेदनों पर किसी भी प्रकार की पेनल्टी ना लगाई जावे।
6. इस नियम में लगी 5000 स्क्वायर फीट की सीमा को समाप्त कर दिया जावे और इसे सभी के लिए समान रूप से बाजार मूल्य की गाइड लाइन का आधा या 1 प्रतिशत की दर से फ्री होल्ड भूमि का पट्टा प्रदान किया जाए जिससे इस नियम का लाभ नीमच का प्रत्येक नागरिक समान रूप से ले सकेगा और जिससे इस शासन व नगरपालिका को भी करोड़ों रुपए की आय हो जाएगी।
7. भूमि धारक जिस प्रकार से उक्त भूमि का व्यवसायिक व आवासीय उपयोग कर रहा है यह या जिस भी प्रकार का भूमि उपयोग आवेदन कर्ता द्वारा प्रस्तावित है उसे उसी रूप में मास्टर प्लान में संशोधन कर पट्टा प्रदान किया जावे।