सरवानिया महाराज। शुक्रवार शाम को देवधणी दरबार मालासेरी देव डूंगरी के भगवान देवनारायण के ख्यातनाम पुजारी राष्ट्रीय संत हेमराज पोसवाल का अल्प प्रवास पर सरवानिया महाराज आगमन हुआ। श्री पोसवाल के आगमन से उनके अनुयायीयों में उत्साह नजर आया और शहर के प्रसिद्ध देव स्थल जौडेश्वर श्याम मंदिर पर समिति सदस्यों ने उपस्थित होकर उनकी अगवानी की। पहली बार श्री पोसवाल अपने अनुयायियों के बीच पहुंचे थे तो उन्हें भी बहुत अच्छा लगा और वो सभी धर्मप्रेमी बंधुओं को मालासेरी देव डूंगरी आने का निमंत्रण देकर रात्रि को अपने गंतव्य को प्रस्थान कर गए। इस दौरान राजनीतिक और सामाजिक लोगों ने उनसे भेंट की। गौरतलब है कि संत श्री पोसवाल देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बहुत निकट है और वाट्सएप पर उनकी बात होती रहती है इनके विषेश निवेदन पर ही मालासेरी डूंगरी पर विकास कार्य हेतु ढाई सो करोड़ का बजट प्रस्तावित हैं।
पत्थरों को चिरकर कमल में जन्मे देव-
माता साडू की अखंड तपस्या से खुश होकर भगवान श्री हरि विष्णु ने अरावली पर्वतमाला के उपर पत्थरों को चिरकर कर कमल के फूल में माघ सुदी सप्तमी 968 को मालासेरी डूंगरी राजस्थान पर लोक देवता श्री देवनारायण भगवान के रूप में जन्म लिया। यह ऐतिहासिक महत्व का स्थल आज राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त कर चुका है। इसको संवारने के लिए केंद्र सरकार ने ढाई सो करोड़ रुपए का बजट रखा है जिसमें से करीब पचास करोड़ रुपए स्वीकृत हो गये है।
पुजारी संत श्री हेमराज जी पोसवाल ने बताया कि प्राचीन काल से ही हमारे परिवार के लोग गुर्जर पोसवाल यंहा देव जी की पुजा करते आ रहे हैं। यंहा श्रृद्धालुओं की आवश्यकताओं को देखते हुए विकास कार्य कराए जा रहे हैं। तथा भगवान देवनारायण के जन्म से जुड़े अमीट इतिहास को मुर्तियो के माध्यम से बताने के लिए राजस्थान सरकार द्वारा पेनोरमा बनवाया गया है। यह देव भूमि भौगोलिक एवं धार्मिक क्षेत्र का महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है।
छुआ छूत और अंधविश्वास के विरोधी हैं देव-
भले ही आजादी के बाद और पहले भारत से छुआ छूत मिटाने और अंधविश्वास को दुर करने कितने ही प्रयास किए गए हो लेकिन आज भी यह समस्या कई जगह सर उठा कर खड़ी है, ना जाने कितने लोग अंधविश्वास में आकर गलत कदम उठा रहे हैं। परंतु भारत की पावन भूमि पर लोक देवता देवनारायण का जन्म अपने आप में इतिहास लिए है वो छुआ छूत और अंधविश्वास के खिलाफ रहे उन्होंने ने हर एक को गले लगाकर समाज कल्याण और अंधविश्वास को दुर भगाने का काम किया। देव पर्यावरण संरक्षण के लिए काम किया। आज भी उनकी वाणी और कर्म उनके अनुयायीयों भक्तों में विशेष महत्व रखते हैं।
शिक्षक वीरेन्द्र गूर्जर के संपर्क उन्हें सरवानिया ले आए-
पेशे से सरकारी शिक्षक सरवानिया के सांदीपनी सीएम राइज स्कूल में पदस्थ वीरेन्द्र कुमार गूर्जर स्वयं माता का खेड़ा गांव में बिराजमान भगवान देवनारायण मंदिर के पूजारी है और उनका परिवार भगवान देवनारायण की अनन्य भक्ति के साथ साथ देव में अटुट आस्था रखता है। उनका मालासेरी डूंगरी आना जाना लगा रहता है तो उनके संपर्क पुजारी संत हेमराज पोसवाल जी से गहरे हो गये। इसी कड़ी में उनके संपर्क के चलते शुक्रवार को वो मालवा की वैष्णोदेवी मां भादवा के दर्शन कर सरवानियां पहुंचे इसके बाद पहले जौडेश्वर श्याम मंदिर बाद में शिक्षक वीरेन्द्र कुमार गूर्जर के निवास स्थान पर लोगों ने स्वागत कर आर्शीवाद लिया।