भगवानपुरा। धुलकोट सकल हिंदू समाज के आह्वान पर भगवानपुरा खंड के धुलकोट मंडल में भव्य हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में सनातनी बंधुओं ने सहभागिता की। सम्मेलन में जनजाति समाज के संतों, मातृशक्ति एवं अतिथियों ने समाज को संबोधित किया।
सम्मेलन के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए जनजाति समाज के संतों ने कहा कि हिंदू समाज अत्यंत प्राचीन है और जनजाति समाज प्रकृति पूजक रहा है। वे धरती माता, इंदल देव, बाब देव एवं घिंचरी माता की पूजा करते आए हैं। वक्ताओं ने चिंता व्यक्त की कि आज इस प्राचीन समाज और परंपराओं को तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इसी के प्रति जागरूकता लाने और समाज को संगठित रखने के लिए इस हिंदू सम्मेलन का आयोजन आवश्यक था। सम्मेलन के माध्यम से समाज को एकजुट रहने और अपनी परंपराओं को सहेजने का संदेश दिया गया।
इस अवसर पर धुलकोट मंडल के अंतर्गत आने वाले 12 ग्रामों से हिंदू समाज के लोग एकत्रित हुए। सभी ग्रामों से ग्राम पटेल अपने-अपने ढोल-मांदल के साथ पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे, जिससे कार्यक्रम स्थल पर सांस्कृतिक छटा देखने को मिली। हर ग्राम एवं समाज के जनमानस की सक्रिय सहभागिता रही।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 10 बजे हुई। इसके अंतर्गत कलश यात्रा श्री मनोकामनेश्वर महादेव मंदिर, सेंधवा रोड धुलकोट से प्रारंभ होकर विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए दोपहर 12 बजे कार्यक्रम स्थल पर पहुंची। इसके पश्चात भारत माता के पूजन के साथ सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में विभिन्न समाजों के प्रमुख व्यक्तियों, संतों एवं ग्राम पटेलों का सम्मान किया गया। बाद में वक्ताओं के उद्बोधन हुए तथा भारत माता की सामूहिक आरती की गई।
सम्मेलन के दौरान उपस्थित समाजजनों ने सामूहिक रूप से समाज को एकजुट रखने एवं धर्मांतरण नहीं करने का संकल्प लिया। इसके पश्चात सामूहिक भोज (भंडारा) का आयोजन भी किया गया।
इस अवसर पर जनजाति प्रांत संयोजक कैलाश अमलियार ने समाज को पंच परिवर्तन का संकल्प दिलाया। उन्होंने पंच परिवर्तन के अंतर्गत (1) स्व का बोध (स्वदेशी), (2) नागरिक कर्तव्य, (3) पर्यावरण संरक्षण, (4) सामाजिक समरसता एवं (5) कुटुंब प्रबोधन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पंच परिवर्तन कार्यक्रम को प्रभावी रूप से लागू करने से समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव है। स्वदेशी अपनाने से आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, नागरिक कर्तव्यों के पालन से राष्ट्र सशक्त होगा, सामाजिक समरसता से ऊंच-नीच और जातिगत भेद समाप्त होंगे, पर्यावरण संरक्षण से सृष्टि सुरक्षित रहेगी तथा कुटुंब प्रबोधन से पारिवारिक संस्कार मजबूत होंगे।
वक्ताओं ने बढ़ते एकल परिवार की प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए भारत की प्राचीन संयुक्त परिवार परंपरा को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर जोर दिया। अंत में सम्मेलन का शांतिपूर्ण एवं गरिमामय समापन हुआ।