मनासा। भाटखेड़ा में स्थित गौशाला परिसर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं को ध्रुव और प्रहलाद के महान प्रसंग का श्रवण कराया गया। कथा वाचक पं. परशराम जी शर्मा (केलुखेड़ा) ने तृतीय स्कंध के अंतर्गत ध्रुव की कठोर तपस्या और अडिग भक्ति का भावपूर्ण वर्णन किया।
कथा में बताया गया कि बालक ध्रुव को अपने पिता की गोद में बैठने से उनकी दूसरी माता ने यह कहकर रोक दिया कि पहले तपस्या कर आओ, तभी पिता की गोद में बैठने का अधिकार मिलेगा। इस अपमान ने ध्रुव को विचलित नहीं किया, बल्कि उन्होंने प्रभु की आराधना को जीवन का लक्ष्य बनाकर कठोर तपस्या की और अपने दृढ़ संकल्प से भगवान को प्रसन्न किया। वहीं, प्रहलाद के प्रसंग के माध्यम से भक्त और भगवान के अटूट संबंध, सत्य और भक्ति की विजय का संदेश दिया गया।
पं. परशराम जी शर्मा ने अमृतवाणी में कहा कि ध्रुव और प्रहलाद जैसे आदर्श आज के समाज को यह सिखाते हैं कि विपरीत परिस्थितियों में भी आस्था, धैर्य और भक्ति से जीवन में श्रेष्ठता प्राप्त की जा सकती है। कथा के दौरान वातावरण भक्ति-रस से सराबोर रहा और श्रोतागण भाव-विभोर होकर कथा का श्रवण करते रहे।
यह आयोजन भातखेड़ा निवासी अग्रवाल परिवार के सहयोग से किया जा रहा है, जिसमें गांव सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर श्रीमद् भागवत कथा का लाभ ले रहे हैं।