सरवानियां महाराज। हरियाली से आच्छादित, गौरेया की मधुर चहचहाहट और अरावली पर्वत की सुरम्य वादियों के शिखर पर स्थित माता रंकावली धाम अनेक गांवों एवं असंख्य श्रद्धालुओं की भक्ति और आस्था का प्रमुख केंद्र है। मान्यता है कि मां रंकावली भक्तों की पुकार सुनकर उनके दुख-दर्द दूर करती हैं।
यहां वर्ष 2026 की 8 जनवरी से प्रारंभ हुई सोलहवीं श्रीमद् भागवत कथा का विश्राम आज 14 जनवरी, मकर संक्रांति के पावन अवसर पर होगा। कथा का वाचन प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से सायं 4 बजे तक किया गया। सात दिवसीय इस आयोजन का संचालन श्री रंकावली माता मंदिर विकास समिति एवं सकल ग्राम क्षेत्रवासियों के तत्वावधान में किया गया।
इस अवसर पर प्रसिद्ध संत एवं ख्यातनाम कथा वाचक पं. भीमाशंकर शर्मा (शास्त्री) के सुपुत्र, भागवत कथा प्रवक्ता पं. रामकृष्ण शर्मा ने प्रवचन देते हुए कहा कि मनुष्य अनेक वासनाओं से ग्रसित होकर पापकर्मों की ओर अग्रसर हो रहा है। उन्होंने कहा कि इनसे बचाव के लिए हरि कीर्तन एवं प्रभु के चरणों में मन लगाना आवश्यक है। भगवान बाह्य आडंबर नहीं, बल्कि अंतर की पवित्रता देखते हैं।
पं. शर्मा ने कहा कि जहां कथनी और करनी में अंतर होता है, वहां पाखंड जन्म लेता है। आज के दौर में सुनी-सुनाई बातों से रिश्तों में विष घुल रहा है, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को विवेकपूर्ण ढंग से सत्य की परख करनी चाहिए। उन्होंने विवाह संस्कारों में आ रहे आधुनिक बदलावों पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि डीजे और दिखावे के चलते विधि-विधान की उपेक्षा की जा रही है, जिससे वैवाहिक जीवन में समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। कथा के दौरान श्रीकृष्ण योगेश्वर के जीवन चरित्र, भक्त नरसी मेहता की भक्ति एवं नानी बाई के मायरे का भावपूर्ण वर्णन किया गया। संगीतमय भजनों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
कथा श्रवण हेतु रूपपुरा, रानीपुरिया, चोकानखेड़ा, मैलानखेड़ा, आंकली, आमलीभाट, सरवानियां महाराज, जावद, लोद, गायरियावास, नयागांव, बावल, जुनी बावल, कनेरा, लालपुरा सहित अनेक ग्रामों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
दो करोड़ की लागत से संवरेगा मां रंकावली का मंदिर-
माता रंकावली धाम की तस्वीर अब पूरी तरह बदल चुकी है। कभी जहां यहां तक पहुंचना कठिन था, आज सड़क, पेयजल, सौंदर्यीकरण, पर्यावरण विकास एवं नव निर्मित डोम जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। यह सब मंदिर विकास समिति के सतत प्रयासों, जनसहयोग, सामाजिक-राजनीतिक सहभागिता एवं शासकीय योजनाओं के माध्यम से संभव हो पाया है।
भक्तों की वर्षों पुरानी भावना को ध्यान में रखते हुए अब मंदिर के जीर्णाेद्धार का निर्णय लिया गया है। मंदिर विकास समिति द्वारा लगभग 2 करोड़ रुपये की लागत से राजस्थान के व्हाइट मार्बल पत्थरों से भव्य मंदिर निर्माण की योजना बनाई गई है। इसके लिए धन संग्रह का कार्य प्रारंभ हो चुका है। समिति के पास पुरानी बचत एवं नवीन सहयोग से अब तक लगभग 34 लाख रुपये जमा हो चुके हैं। मंदिर जीर्णाेद्धार हेतु डीपीआर तैयार कर थ्री-डी नक्शा बनवाया जा रहा है, जिसके आधार पर निर्माण कार्य किया जाएगा।