निंबाहेड़ा। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के निंबाहेड़ा सेवा केंद्र पर मकर संक्रांति का पर्व आध्यात्मिक उल्लास और उमंग-उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर सेवा केंद्र प्रभारी बीके शिवली दीदी ने मकर संक्रांति के आध्यात्मिक रहस्य और जीवन में इसके महत्व पर प्रकाश डाला।
बीके शिवली दीदी ने बताया कि मकर संक्रांति के दिन सूर्य राशि परिवर्तन करता है, लेकिन वास्तविकता में सूर्य स्थिर रहता है। यह पर्व ज्ञान-सूर्य शिव बाबा की यादगार है, जिन्होंने संगम युग में कलियुग से सतयुग की स्थापना का आधार रखा। उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति पर वास्तविक दान स्थूल वस्तुओं का नहीं, बल्कि अपने अंदर छुपी बुराइयों, विकारों और नकारात्मक संस्कारों का परमात्मा को अर्पण करना है।
उन्होंने जीवन में सदैव उमंग-उत्साह बनाए रखने और ऊँचाइयों की ओर बढ़ने के लिए परमात्मा की श्रीमत रूपी डोर से बंधे रहने की प्रेरणा दी। तिल और गुड़ का महत्व समझाते हुए कहा कि जीवन में मधुरता हो तभी हम आत्मा रूपी तिल बनकर दूसरों के साथ मिलजुलकर रह सकते हैं।
कार्यक्रम के अंत में सभी भाई-बहनों ने विभिन्न खेलों में भाग लिया। सभी को प्रसाद वितरित किया गया और मकर संक्रांति का पर्व आनंद, सौहार्द और आध्यात्मिक अनुभूति के साथ संपन्न हुआ।