चित्तौड़गढ़। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के निंबाहेड़ा सेवा केंद्र पर प्रजापिता ब्रह्मा बाबा का 57वां पुण्य स्मृति दिवस श्रद्धा एवं भावपूर्ण वातावरण में मनाया गया। यह दिवस पूरे विश्व में विश्व शांति दिवस के रूप में मनाया जाता है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बीके आशा दीदी ने बताया कि ब्रह्माकुमारी संस्थान के साकार संस्थापक पिता श्री ब्रह्मा बाबा इस कलयुग की सृष्टि में एक महान एवं पुण्य आत्मा के रूप में अवतरित हुए, जिन्होंने परमपिता परमात्मा शिव बाबा का साकार माध्यम बनकर विश्व में आध्यात्मिक जागरण का कार्य किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 1936-37 से परमपिता परमात्मा शिव ने उनके साकार रथ का आधार लेकर पुनः एक स्वर्णिम सृष्टि के निर्माण का दिव्य कार्य प्रारंभ किया।
बीके आशा दीदी ने कहा कि पिता श्री ब्रह्मा बाबा ने अपना तन, मन, धन, समय, श्वास, संकल्प और संबंध परमात्मा की श्रीमत अनुसार इस ईश्वरीय यज्ञ में समर्पित कर दिए। उन्होंने कभी भी अपनी मनमत को महत्व नहीं दिया और सदैव स्वयं को एक सेवादारी के रूप में ही प्रस्तुत किया।
उन्होंने आगे कहा कि ब्रह्मा बाबा ने साधारण माता-बहनों और कन्याओं को शिव शक्ति के रूप में विश्व पटल पर प्रतिष्ठित किया। समाज में उपेक्षित मानी जाने वाली इन माताओं के माध्यम से ईश्वरीय सेवा का जो स्वरूप आज दिखाई देता है, वह पिता श्री ब्रह्मा बाबा की दूरदृष्टि और तपस्या का परिणाम है। आज प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय केवल एक संस्था नहीं, बल्कि एक वैश्विक ईश्वरीय परिवार बन चुका है, जो भारत ही नहीं बल्कि संपूर्ण विश्व में आध्यात्मिक ज्ञान का प्रसार कर रहा है।
बीके आशा दीदी ने कहा कि पिताश्री ब्रह्मा बाबा सदैव स्वयं को ईश्वरीय सेवा का निमित्त और निर्माण मानते रहे तथा इस सृष्टि में आध्यात्मिक क्रांति लाने के लिए एक सशक्त अग्रदूत बने।
कार्यक्रम में उपस्थित सभी भाई-बहनों एवं सभा में मौजूद यू.एस. शर्मा, एकता मराठा, माताजी अवनीश गर्ग सहित अन्य अतिथियों ने पिता श्री ब्रह्मा बाबा को श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
कार्यक्रम के अंत में निंबाहेड़ा सेवा केंद्र प्रभारी बीके शिवली दीदी ने सभी उपस्थितजनों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यदि हम अपने जीवन में पिताश्री ब्रह्मा बाबा के गुणों को अपनाएं और उनके समान बनने का प्रयास करें, तो यही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।