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January 20, 2026, 5:45 pm
NEWS : प्रतापगढ़ जिले के खेतों में खिला ‘काला सोना’, सफेद फूलों से महके अफीम के खेत, मौसम की प्रतिकूूलता और नीलगायों ने बढ़ाई काश्तकारों की चिंता, सुरक्षा के लिए रातभर दे रहे पहरा, पढ़े युनूस मंसूरी की खबर 

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प्रतापगढ़। देशभर में ‘काले सोने’ के नाम से विख्यात अफीम की खेती के लिए पहचाने जाने वाले प्रतापगढ़ जिले में इन दिनों खेतों में अफीम की बहुमूल्य फसल लहलहा रही है। फसलों पर सफेद फूल खिलने की शुरुआत के साथ ही अफीम उत्पादक किसानों में उत्साह का माहौल है। फूल झड़ने के बाद डोडा बनने की प्रक्रिया प्रारंभ होगी, जिसके पश्चात किसान परंपरानुसार मां काली की पूजा-अर्चना कर डोडों पर चीरा लगाकर अफीम के दूध के संग्रहण का कार्य शुरू करेंगे।

हालांकि खुशी के इस माहौल के बीच किसानों की चिंताएं भी कम नहीं हैं। बहुमूल्य फसल को जंगली जानवरों से बचाने के लिए किसान इन दिनों रातभर खेतों की रखवाली करने को मजबूर हैं। कड़ाके की ठंड में किसान खेतों में डेरा डालकर फसल की सुरक्षा कर रहे हैं। कई किसान तारबंदी करा रहे हैं, तो कई देसी उपाय अपनाकर फसल बचाने का प्रयास कर रहे हैं।

मौसम में हो रहे लगातार उतार-चढ़ाव ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। किसानों के अनुसार फसल को रोगों से बचाने के लिए कीटनाशकों का छिड़काव करना पड़ रहा है। अफीम की फसल में काली मस्सी, सफेद मस्सी, खांखरिया रोग, तना सड़न तथा पत्तियों के पीले पड़ने जैसी बीमारियां दिखाई देने लगी हैं।

मौसम परिवर्तन से बढ़ी चिंता, पीलिया रोग का खतरा-
किसानों का कहना है कि अफीम की खेती पूरी तरह मौसम पर निर्भर रहती है। जनवरी माह में अचानक तापमान बढ़ने से फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। मौसम परिवर्तन के कारण पत्तियों का रंग पीला पड़ने लगा है। पीलिया रोग के चलते डोडों में दूध कम बनता है या उड़ जाता है, जिससे उत्पादन प्रभावित होता है और निर्धारित औसत पूरा नहीं हो पाता।

नीलगाय बनी किसानों की सबसे बड़ी चुनौती-
नीलगायों का आतंक भी किसानों के लिए बड़ी समस्या बना हुआ है। रात के समय झुंड में नीलगाय खेतों में घुसकर फसल को चट कर जाती हैं और रौंदकर भारी नुकसान पहुंचाती हैं। इससे बचाव के लिए किसान पटाखे छोड़ रहे हैं, खेतों की मेड़ों पर साड़ियां बांध रहे हैं, ऑडियो-वीडियो चलाकर डराने का प्रयास कर रहे हैं और कई स्थानों पर लोहे की तारबंदी भी कराई जा रही है। फिलहाल खेतों में लहलहाती अफीम की फसल से किसानों में उम्मीद बनी हुई है, लेकिन मौसम की मार और जंगली जानवरों का खतरा इस ‘काले सोने’ को लेकर किसानों की नींद उड़ाए हुए है।

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