नीमच। तारीख़-ए-इस्लाम की अज़ीम शख्सियत हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम एवं उनके भाई जनाबे अब्बास अलमदार अलैहिस्सलाम की विलादत की ख़ुशी में बीती रात नीमच में दाऊदी बोहरा समुदाय द्वारा अकीदत, एहतराम और जोश-ओ-ख़रोश के साथ जश्न मनाया गया।
हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम, पैग़म्बर-ए-इस्लाम हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा (स.अ.) के नवासे तथा हज़रत अली और बीबी फ़ातिमा ज़हरा के सुपुत्र थे। उन्होंने करबला की धरती पर ज़ुल्म और नाइंसाफ़ी के ख़िलाफ़ डटकर खड़े होकर इंसानियत, सच्चाई और कुर्बानी की ऐसी मिसाल पेश की, जो क़यामत तक याद रखी जाएगी। वहीं जनाबे अब्बास अलमदार अलैहिस्सलाम वफ़ा, बहादुरी और भाईचारे की प्रतीक माने जाते हैं, जिन्हें “बाबुल हवाइज” के नाम से भी जाना जाता है।
जश्न का आग़ाज़ बोहरा बाज़ार स्थित मस्जिद में मजलिस-ए-हुसैन से हुआ, जहां हज़रत इमाम हुसैन एवं जनाबे अब्बास अलमदार की पाक ज़िंदगी और उनके आदर्शों पर प्रकाश डाला गया। इसके पश्चात अकीदतमंदों द्वारा भव्य जुलूस निकाला गया।
जुलूस के दौरान “इमाम हुसैन ज़िंदाबाद” और “हिंदुस्तान ज़िंदाबाद” के नारे गूंजते रहे। नौजवानों ने पूरे जोश के साथ तिरंगा और अलम-ए-अब्बास बुलंद किया। स्काउट बैंड की सहभागिता ने जुलूस की शोभा और अधिक बढ़ा दी।
इस अवसर पर सैफ़ी मोहल्ला आकर्षक रोशनी से जगमगा उठा। आतिशबाज़ी के साथ जश्न का दृश्य और भी मनोहारी बन गया। जुलूस के समापन के बाद समुदाय के बुज़ुर्गों एवं ज़िम्मेदारजनों द्वारा केक काटकर एक-दूसरे को मुबारकबाद दी गई।
अंत में सैफ़ी मोहल्ला स्थित सैफ़ी हॉल में नियाज़-ए-हुसैन का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत कर बरकत हासिल की। पूरा माहौल अकीदत, भाईचारे और अमन-ओ-मोहब्बत से सराबोर नज़र आया।