चित्तौड़गढ़। बसंत पंचमी के पावन अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, निंबाहेड़ा सेवा केंद्र में आध्यात्मिक उल्लास एवं दिव्य अनुभूति से परिपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सेवा केंद्र प्रभारी बीके शिवली दीदी ने उपस्थित भाई-बहनों को बसंत पंचमी का गूढ़ आध्यात्मिक रहस्य सरल, सहज एवं प्रभावशाली शब्दों में समझाया।
बीके शिवली दीदी ने कहा कि बसंत पंचमी केवल ऋतु परिवर्तन का पर्व नहीं है, बल्कि यह जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का प्रतीक है। जैसे बसंत ऋतु में प्रकृति नवजीवन से भर जाती है, वैसे ही जीवन में गुरु के आगमन से जीवन बसंतमय हो जाता है। उन्होंने प्रेरणादायी संदेश देते हुए कहा यदि जीवन में गुरु है तो बसंत है, और यदि गुरु नहीं तो बस अंत है। इसलिए जीवन में सद्गुरु का होना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने आगे बताया कि वर्तमान समय सृष्टि चक्र का पावन पुरुषोत्तम संगम युग है, जिसमें भोलानाथ परम पिता परमात्मा सत्यम-शिवम-सुंदरम प्रजापिता ब्रह्मा के तन में अवतरित होकर समस्त मानवता को सत्य ज्ञान का प्रकाश प्रदान कर रहे हैं और जीवन को श्रेष्ठ बनाने की राह दिखा रहे हैं। जब ज्ञान की देवी सरस्वती सत्य रूप में जीवन में समाहित हो जाती है, तब जीवन बसंतमय बन जाता है और संपूर्ण सृष्टि भी स्वर्णिम युग की ओर अग्रसर होती है।
इस अवसर पर बीके शिवली दीदी ने सभी को परमात्मा शिव को अपना सद्गुरु बनाकर उनकी स्मृति में रहकर जीवन को बसंत स्वरूप बनाने का संदेश दिया।
कार्यक्रम के अंतर्गत अंबा माता के पावन परिसर में सभी भाई-बहनों ने परमात्मा शिव बाबा की स्मृति में योग साधना की, जिससे वातावरण दिव्य सकारात्मक ऊर्जा से भर गया। साथ ही आध्यात्मिक खेलों का आयोजन किया गया एवं ईश्वरीय प्रसाद ग्रहण कर सभी ने आत्मिक आनंद की अनुभूति की।
यह आयोजन सभी उपस्थितजनों के लिए आत्मिक ताजगी, उत्साह एवं आध्यात्मिक उल्लास से परिपूर्ण रहा।