मनासा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर देशभर में हिंदू सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। इन सम्मेलनों का उद्देश्य समाज में समरसता का निर्माण करना, संघ की 100 वर्षों की यात्रा से समाज को अवगत कराना तथा पंच परिवर्तन के पाँच मूल मंत्र- सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी भाव और नागरिक कर्तव्य- के माध्यम से संस्कारित समाज का निर्माण करना है। साथ ही नवयुवकों में राष्ट्रप्रेम की भावना जागृत करना भी इसका प्रमुख लक्ष्य है।
इसी क्रम में मनासा खंड में द्वारिका बस्ती एवं जगन्नाथ बस्ती का सामूहिक हिंदू सम्मेलन भव्य रूप से आयोजित किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में हिंदू समाजजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत भव्य कीर्तन एवं कलश यात्रा से हुई, इसके पश्चात विशाल धर्मसभा का आयोजन किया गया।
धर्मसभा में मुख्य अतिथि के रूप में महंत योगी लालनाथ जी (निवासी अठाना, जिला नीमच), विशिष्ट अतिथि दीदी जयमाला जी वैष्णव (निवासी नीलिया, जिला नीमच) तथा प्रमुख वक्ता के रूप में जिला कार्यवाह पवन सज्जन उपस्थित रहे।
महंत योगी लालनाथ जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि जातियों में बँटने के बजाय धर्म पर ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने परिवार व्यवस्था को मजबूत करने और पारिवारिक मूल्यों को बनाए रखने पर जोर दिया।
दीदी जयमाला जी ने कहा कि “बटोगे तो कटोगे”, सनातन धर्म साक्षात ईश्वर का स्वरूप है। प्रत्येक हिंदू को अपने जीवन में धार्मिक और सांस्कृतिक संस्कारों को अपनाना चाहिए।
जिला कार्यवाह पवन सज्जन ने पंच परिवर्तन की अवधारणा को विस्तार से समझाते हुए सामाजिक एकता, पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन, स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग और नागरिक कर्तव्यों के पालन का आह्वान किया।
कार्यक्रम के समापन के पश्चात सहभोज का आयोजन किया गया। सम्मेलन में उपस्थित समस्त हिंदू समाजजनों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए हिंदू एकता का परिचय दिया।