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January 29, 2026, 7:38 pm
NEWS : श्री कल्लाजी वेदपीठ पर सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव श्रद्धा व भक्ति के साथ संपन्न, पं. विकास नागदा ने कहा- मैत्री हो तो सुदामा-कृष्ण की जैसी.., पढ़े रेखा खाबिया की खबर

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चित्तौड़गढ़। श्री कल्लाजी वेदपीठ एवं शोध संस्थान के तत्वावधान में बसंत पंचमी के पावन अवसर पर आयोजित सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव गुरुवार को कल्याणनगरी स्थित श्री कल्लाजी वेदपीठ परिसर में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के वातावरण में विधिवत संपन्न हुआ। महोत्सव का शुभारंभ माघ शुक्ल बसंत पंचमी (शुक्रवार) को हुआ था।

कथा वाचक गौनंदन पं. विकास नागदा ने संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का भावपूर्ण व रसपूर्ण वाचन किया। प्रथम दिवस श्रीमद्भागवत महात्म्य एवं मंगलाचरण का वर्णन किया गया। द्वितीय दिवस कुंती स्तुति एवं कपिल उपाख्यान, तृतीय दिवस सती चरित्र, जड़भरत एवं ध्रुव चरित्र, तथा चतुर्थ दिवस श्रीराम एवं श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का भव्य वर्णन प्रस्तुत किया गया।

पंचम दिवस बालकृष्ण की लीलाओं एवं गोवर्धन पूजा प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। षष्ठम दिवस महारास लीला एवं रुक्मिणी मंगल का अत्यंत सुंदर एवं भावपूर्ण वर्णन किया गया। सप्तम एवं अंतिम दिवस पं. विकास नागदा ने कहा कि यदि सात दिन कथा श्रवण संभव न हो, तो एक दिन की कथा भी जीवन को धन्य बना देती है।

मित्रता विषय पर प्रवचन करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता संसार के लिए आदर्श है, जहां न अमीरी मायने रखती है और न गरीबी, बल्कि केवल सच्चा प्रेम और भाव ही मित्रता की पहचान होते हैं। सच्चा मित्र वही है, जो अपने मित्र के दुख को अपना समझकर उसे सुख में बदलने का प्रयास करे। इस अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण के 16108 विवाहों तथा आठ प्रमुख पटरानियों का भी विशेष विवेचन किया गया।

समापन अवसर पर फाग उत्सव का आयोजन हुआ, जिसमें रसिया गीतों से वातावरण पूर्णतः वृंदावनमय हो गया। ऐसा प्रतीत हुआ मानो कल्याणनगरी में साक्षात वृंदावन की होली साकार हो उठी हो। राजा परीक्षित के मोक्ष प्रसंग के साथ सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का विधिवत विश्राम हुआ तथा भागवत जी का दशम स्कंध श्री कल्लाजी महाराज के चरणों में अर्पित किया गया।

ठाकुर श्री कल्लाजी का राजाधिराज स्वरूप में अलौकिक श्रृंगार-
सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के उपलक्ष्य में प्रतिदिन ठाकुर श्री कल्लाजी का प्रभु श्रीकृष्ण स्वरूप में आकर्षक एवं मनोहारी श्रृंगार किया गया। महोत्सव के सप्तम एवं अंतिम दिवस ठाकुर श्री कल्लाजी का विशेष रूप से राजाधिराज स्वरूप में अलौकिक श्रृंगार किया गया, जो श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत मनोहक और भावविभोर करने वाला रहा।

श्रद्धालुओं ने प्रभु से सुख, समृद्धि एवं मंगलकामना की प्रार्थना की। श्रृंगार दर्शन के दौरान संपूर्ण मंदिर परिसर भक्तिरस से सराबोर रहा।
 

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